सोनीपत जिले की दो बहनें रोहतक स्थित महिला कॉलेज की छात्राएं थी। नवंबर 2014 में कॉलेज से घर लौट रही थी। 30 नवंबर को एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दोनों बहनों और कुछ युवकों के बीच सीट को लेकर झगड़ा हुआ। दोनों बहनों ने मामले में तीन युवकों दीपक, कुलदीप व मोहित के खिलाफ छेड़छाड़ व मारपीट का केस दर्ज करवाया।
तत्कालीन भाजपा सरकार ने दोनों बहनों को सम्मानित करने का निर्णय लिया। मीडिया में भी उनको बहादुर बहनें बताया गया। मामले में नया मोड़ दो दिसंबर को आया, जब दोनों बहनों का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पार्क के अंदर वे झगड़ा करतीं नजर आईं। साथ ही लड़कों के परिजन सीएम से मिले। सरकार ने दोनों बहनों को 26 जनवरी को सम्मानित करने व 31-31 हजार रुपये इनाम की राशि देने की घोषणा पर रोक लगा दी।
फौज भर्ती होने का आवेदन हो गया था रद्द
मामले में एक आरोपी युवक ने फौज में भर्ती के लिए आवेदन कर रखा था। मामले के तूल पकड़ने पर सेना की ओर से उसका आवेदन रद्द कर दिया गया था। हालांकि लाई डिटेक्टिव टेस्ट रिपोर्ट में आरोप साबित नहीं हो सके। अदालत ने मार्च 2017 में सबूतों के अभाव में तीनों युवकों को बरी कर दिया। इसी बीच दिसंबर 2019 में डॉक्टर सुभाष ने अदालत में याचिका दायर करके दोनों बहनों के खिलाफ झूठे मामले में युवकों को फंसाने पर आपराधिक केस चलाने की मांग की लेकिन निचली अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके खिलाफ उसने एडीजे कोर्ट में अपील की। अब एडीजे कोट में भी उसकी याचिका खारिज हो गई।