चंडीगढ़। साइबर क्राइम पुलिस ने करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी करने वाले डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड गिरोह के दो और शातिरों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के खिलाफ कार्रवाई में अब तक कुल 14 आरोपी पकड़े जा चुके हैं जबकि लगभग 57 लाख रुपये के संदिग्ध खातों को फ्रीज किया जा चुका है।
गिरोह का तरीका बेहद शातिर है। कॉल करने वाला खुद को सीबीआई या अपराध शाखा का अधिकारी बताता है। फिर व्हाट्सएप कॉल, फर्जी गिरफ्तारी वारंट और सुप्रीम कोर्ट के नकली आदेश दिखाकर पीड़ित को डराता है और फिर बड़ी रकम ट्रांसफर करवाता है। साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को अधिकारी बताने वाले व्यक्ति से सतर्क रहें और तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
पहला मामला : चार बैंकों के जरिये उड़ाए ₹77 लाख
मंजीत कौर नामक महिला से इस वर्ष की शुरुआत में गिरोह ने खुद को अपराध शाखा का अफसर बताते हुए चार अलग-अलग बैंकों से कुल ₹77,42,420 ट्रांसफर करवा लिए। जांच में यह राशि इंदौर निवासी हेमंत कुमार कंसल (60) के खाते में ट्रेस हुई।
हेमंत के नर्सिंग होम खाते से ₹3.85 करोड़ का लेनदेन
पूछताछ में हेमंत ने माना कि उसने अपने नाम पर करुण मैटरनिटी एंड नर्सिंग होम का खाता खुलवाकर उस माध्यम से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की रकम घुमाई और बदले में कमीशन लिया।
दूसरा मामला: फर्जी दस्तावेज और वीडियो कॉल से ठगे ₹1.01 करोड़
लुधियाना निवासी मंजीत बेहल से आरोपी ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए व्हाट्सएप वीडियो कॉल और फर्जी दस्तावेजों से डराया। फिर कई खातों में ₹1,01,65,094 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। इस मामले में लुधियाना के अभिजीत तिवारी (23) को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार उसके खातों में बड़ी मात्रा में संदिग्ध लेनदेन हुआ है।
पुलिस की कार्रवाई
अब तक 14 आरोपियों की गिरफ्तारी
57 लाख रुपये से अधिक की राशि फ्रीज
देशभर में फैले खातों और कॉलिंग नेटवर्क की जांच जारी