दो दिन चंद्रमा पर अजब नजारा रहेगा। आज चांद पूरे आकार में उदय होकर पृथ्वी को रोशनी से सराबोर करेगा, तो कल यह प्रकाश फीका पड़ता नजर आएगा।
सात अक्तूबर को शरद पूर्णिमा तो अगले दिन आठ अक्तूबर को चंद्रग्रहण रहने वाला है। मंगलवार को शाम 7:13 से अगले दिन 4:20 तक पूर्णिमा रहेगी, जबकि बुधवार को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट पर ग्रहण लगेगा। उत्तर भारत की बात करें तो यहां आठ से दस मिनट तक ग्रहण देखा जा सकेगा और 6:04 पर यह समाप्त हो जाएगा।
दो दिन चंद्रमा के अलौकिक नजारे को लेकर खगोल शास्त्री भी उत्साहित हैं, जो इन दृश्यों को कैद करने और इस पर रिसर्च की तैयारी में जुट गए हैं। उधर, ज्योतिषियों द्वारा लोगों को शरद पूर्णिमा पर किए जाने वाले अनुष्ठान बताने के साथ चंद्रग्रहण के राशियों पर पड़ने वाले असर पर गणित भी तैयार कर लिया गया है।
चांदनी में रखने से अमृत बन जाती खीर
हिंदू शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा को चांद पूरे आकार में उदय होता है और इससे कई मान्यता जुड़ी हैं। ज्योतिषियाें की मानें तो पूर्णिमा की रात में गाय के दूध की बनी खीर में देसी घी और खांड मिलाकर चांद की रोशनी में रखा जाता है। चांदनी में पूरी रात रखी खीर अमृत के समान गुणकारी बन जाती है। अगले दिन पूरा परिवार इसका श्रद्धाभाव से सेवन करता है। इससे शारीरिक और आत्मिक स्तर पर इंसान तृप्त हो जाता है और असाध्य रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है।
वृष, मकर व धनु छोड़ शेष राशियाें पर रहेगा ग्रहण का प्रभाव
ज्योतिषी गणित के अनुसार आठ अक्तूबर को होने वाले इस चंद्रग्रहण का वृष, मकर और धनु को छोड़ शेष राशियों पर खासा असर रहेगा। उनकी मानें तो चंद्रग्रहण कुंभ, मिथुन, तुला, सिंह, कन्या, मीन और मेष पर भारी रहेगा, जबकि अन्य राशियों पर इसका मिलाजुला असर रहेगा।
ज्योतिषी महेश शांडिल्य ने बताया कि आठ अक्तूबर को लगने वाला चंद्रग्रहण सूतक सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। यह ग्रहण रेवती नक्षत्र में मीन राशि पर घटित होगा, जिसका कुंभ, मीन और मेष राशि पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। इन राशियों के लोगों के लिए ग्रहण जहां कष्टदायी होगा वहीं, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक और कर्क पर इसका मिलाजुला असर रहेगा। जबकि वृष, धनु और मकर राशि वालों के लिए यह ग्रहण लाभकारी सिद्ध होगा।
चंद्रग्रहण काल में ये करें उपाय
महेश शांडिल्य ने बताया कि जिन लोगों की कुंडली में सर्प दोष है, वे ग्रहण काल में चांदी के सर्प का जोड़ा चलते जल में अथवा शिवलिंग पर अर्पण करें या फिर रां राहवे नम: मंत्र का जाप करें। इसके अलावा ग्रहण सूतक और ग्रहण काल में तीर्थ स्थान, दान, जप, मंत्र सिद्धि, स्त्रोत पाठ और हवन आदि करना भी अति उत्तम है। जबकि इस दौरान देव मूर्ति के स्पर्श, अनावश्यक खान-पान, सोने आदि से बचें।