अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही आपको शहर में इलेक्ट्रिक बसें चलती नजर आएंगी। इससे जहां प्रदूषण कम होगा। वहीं पेट्रो पदार्थों पर से भी दबाव कम होगा। शहर में 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट विभाग की तरफ से दूसरी बार किए गए टेंडर में दो कंपनियों ने आवेदन किया है। जानकारी के अनुसार एक कंपनी ने 64 रुपये प्रति किमी तो दूसरे ने 67 रुपये प्रति किमी में बस चलाने के लिए प्रस्ताव दिया है। सीटीयू के अधिकारियों ने कंपनी को फाइनल करने के लिए अब 13 मार्च को गवर्निंग बॉडी की बैठक बुलाई है।
ट्रांसपोर्ट डायरेक्टर उमा शंकर गुप्ता ने बताया कि उन्होंने शहर में 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए दूसरी बार टेंडर जारी किया था। इसमें दो कंपनियों ने आवेदन किया है। सीटीयू ने पहले जो टेंडर जारी किया था, उसमें बसों की रनिंग कॉस्ट 74 रुपये प्रति किलोमीटर बताई गई थी। इसे लेकर जब अधिकारियों ने पड़ताल शुरू की तो पाया कि अन्य राज्यों में इलेक्ट्रिक बसों की रनिंग कॉस्ट इस टेंडर में कोट किए गए रेट के मुकाबले काफी कम है। यही कारण है कि वह टेंडर सिरे नहीं चढ़ पाया था।
प्रशासन ने 10 साल के लिए ये बसें चलाने का करार करना हैं। इसके लिए एक चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित करना होगा। प्रशासन ने मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज एंड पब्लिक इंटरप्राइजेज से इलेक्ट्रिक बसों के लिए फंडिंग करने की मांग की थी, लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया था। इसके बाद यूटी ने खुद ही 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का फैसला लिया था।
पुणे में 56 रुपये प्रति किमी के हिसाब से चल रहीं इलेक्ट्रिक बसें
इलेक्ट्रिक बसों को लेकर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के डायरेक्टर उमाशंकर गुप्ता ने पुणे का भी दौरा किया था। पुणे में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन 56 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से हो रहा है जो चंडीगढ़ के पहले टेंडर में दी 74 रुपये की दरों से काफी कम है। इसी के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई जिसके बाद फैसला लिया गया कि इलेक्ट्रिक बसों को लेकर नए सिरे से टेंडर लगाया जाएगा।
इसके अलावा चीन जाकर भी अफसरों ने इलेक्ट्रिक बसों को लेकर अपने सभी संदेह दूर किए थे। चीन के शंघाई और शेनझेन में करीब सवा दो करोड़ की आबादी है। शेनझेन में पिछले पांच साल से करीब 17 हजार इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। अधिकारियों ने बसों में सफर भी किया। इसके अलावा चार्जिंग से लेकर रखरखाव की प्रक्रिया को भी चेक किया था। साथ ही बसें बनाने वाली कंपनी और इन्हें संचालित करने वाले ट्रांसपोर्ट विभाग और अधिकारियों से भी मुलाकात की थी।