चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन के सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत यूनियन टेरिटरी चाइल्ड प्रोटेक्शन सोसाइटी चंडीगढ़ द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत विषय पर 100-दिवसीय गहन थीमैटिक अभियान के अंतर्गत शहर भर में व्यापक जागरूकता एवं संवेदनशीलता गतिविधियां की गईं। इस दौरान दो बाल विवाहों को रोका भी गया।
यह अभियान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल के अंतर्गत सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास की सचिव अनुराधा चागती के मार्गदर्शन में किया गया। चाइल्ड मैरिज फ्री चंडीगढ़ थीम पर आधारित इस अभियान का उद्देश्य बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य एवं कानूनी दुष्प्रभावों के प्रति जनसामान्य को जागरूक करना था।
इसके साथ विवाह की वैधानिक आयु (लड़कियों के लिए 18 वर्ष एवं लड़कों के लिए 21 वर्ष) तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों (अधिकतम दो वर्ष का कारावास और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना) के बारे में भी जानकारी दी गई। नागरिकों को बाल विवाह की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एवं पुलिस हेल्पलाइन 112 पर देने के लिए भी प्रेरित किया गया।
चंडीगढ़ में कुल 131 जागरूकता और संवेदनशीलता गतिविधियां की गईं। जिनमें समुदाय और कई विभागों के 47,962 व्यक्तियों ने भाग लिया। इनमें नुक्कड़ नाटक, विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों एवं बाल देखभाल संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम शपथ ग्रहण समारोह, पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिताएं, व्याख्यान, कहानी सत्र एवं डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन, मंदिरों, मस्जिदों, मदरसों, बाजारों, अस्पतालों एवं परिवहन केंद्रों पर सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम शामिल रहे।
रेडियो जिंगल्स एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी जागरूकता को सुदृढ़ किया गया। धार्मिक संस्थानों, मैरिज पैलेस, बैंड पार्टियों, कैटरर्स, डीजे, दर्जियों, फोटोग्राफरों, डेकोरेटर्स एवं टेंट हाउस संचालकों से यह सुनिश्चित करने हेतु शपथ-पत्र लिए गए कि वे बाल विवाह को बढ़ावा या सहयोग नहीं देंगे।