चंडीगढ़। शहर में ब्लैक फंगस के 2 मरीज मिले हैं। पीजीआई के कोविड अस्पताल में दोनों का इलाज चल रहा है। हालांकि पीजीआई प्रशासन ने इन मरीजों की पहचान उजागर नहीं की है।
बता दें कि मौजूदा समय में पीजीआई में ब्लैक फंगस के 37 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें सबसे ज्यादा 19 मरीज पंजाब के हैं। वहीं, हरियाणा के 10 और उत्तर प्रदेश के 4 मरीज हैं। पीजीआई प्रशासन के अनुसार, ईएनटी विभाग के डॉक्टर प्रतिदिन ब्लैक फंगस के चार से पांच मरीजों की सर्जरी कर रहे हैं।
मरीज को अस्पताल से छुट्टी देने पर हंगामा
पीजीआई में भर्ती ब्लैक फंगस के दिल्ली के एक मरीज को रविवार शाम अस्पताल से छुट्टी करने पर परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजन बिना इलाज पूरा हुए अपने मरीज को घर ले जाने को तैयार नहीं थे जबकि डॉक्टरों का कहना था कि मरीज की सर्जरी कर उसकी जान बचाई जा चुकी है। अब उसे केवल इंजेक्शन लगवाना है, जिसे वह कहीं भी लगवा सकते हैं। ऐसे में महज इंजेक्शन लगवाने के लिए मरीज को अस्पताल में रखना गलत होगा। कोविड-19 अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल का एक-एक बेड इस समय बहुत ही महत्वपूर्ण है।
पीजीआई में इम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन उपलब्ध
ब्लैक फंगस के इलाज में उपयोग होने वाले इंजेक्शन की पीजीआई में उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है। इस कारण भी वहां भर्ती मरीज बिना इंजेक्शन की पूरी खुराक लिए डिस्चार्ज नहीं होना चाहते। पीजीआई प्रशासन ने इस संबंध में कमेटी को आदेश दिया है कि केवल कन्फर्म केस में ही मरीजों को यह इंजेक्शन उपलब्ध कराया जाए क्योंकि इसका स्टॉक पीजीआई के पास भी बहुत सीमित है।
ये है उपचार
मधुमेह का उचित नियंत्रण। इलेक्ट्रोलाइट के बिगड़ने व रीनल फंक्शन टेस्ट और लिवर फंक्शन टेस्ट। डेड टिश्यू को प्रारंभिक अवस्था में निकालना। फंगल कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्ट। मास्क पहनना, चेहरे में किसी तरह का बदलाव होने पर तत्काल डॉक्टर की राय लें।
इन रोगियों में ब्लैक फंगस की अधिक आशंका
कोविड, मधुमेह के साथ कोविड रोगी जो स्टेरॉयड तथा टोक्लीजुमाव या अन्य इम्यूनोस्पसेट प्रयोग कर रहे हैं और ब्लड शुगर नियंत्रण में नहीं है। जिन कोविड रोगियों का अंग प्रत्यारोपण हो चुका है।
ये हैं लक्षण
चेहरे पर भरापन, चेहरे पर दर्द, माथे में दर्द, आंख का लालीपन, सूजन और आंख के चारों तरफ भरापन। नाक में पपड़ी जमना और खून मिला स्राव निकलना। नाक बंद होना। आंखों में सूजन, पलकों पर सूजन, आंखों की रोशनी जाना, एक के दो दिखना, आंखों का चलाने में दिक्कत, तालू का रंग बदलना, दांतों का ढीला होना, चेहरे और नाक का रंग बदलना, आंखों के पीछे दर्द का होना। इन सभी में से कोई भी लक्षण होने पर रोगी को नाक, कान, गला विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।
सबसे ज्यादा मरीज पंजाब के
चंडीगढ़ 2
पंजाब 19
हरियाणा 10
उत्तर प्रदेश 4
अन्य प्रदेशों के 2
क्या कहते हैं अधिकारी
मौजूदा समय में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में जो मरीज स्टेबल हो जा रहे हैं उन्हें डिस्चार्ज कर अन्य मरीजों को भर्ती करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन बाहर इंजेक्शन की उपलब्धता न होने के कारण डिस्चार्ज करते वक्त ज्यादातर मरीज जाने से इंकार कर रहे हैं। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
-प्रो. जीडी पुरी, पीजीआई कोविड प्रबंधन के चेयरमैन