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जूट मिल ने हैफेड को लगाया तीन करोड़ का चूना

Fri, 21 Mar 2014 10:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा की खरीद एजेंसी हैफेड ने गेहूं भरने के लिए भेजी पौने तीन करोड़ रुपये की पुरानी बोरियों का घोटाला पकड़ा है।
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पुरानी बोरियां यूपी, कानपुर के कालपी रोड स्थित जेके जूट मिल द्वारा 16 मार्च को भेजी गईं और अंबाला रेलवे स्टेशन पर यह 18 मार्च को पहुंची थी। हैफेड ने अंबाला पुलिस के पास मामला दर्ज कराया है।

हैफेड के प्रबंध निदेशक अशोक यादव ने बताया कि गेहूं की खरीद के लिए बोरियों का प्रबंध पहले से करना होता है। बोरियां तैयार कराने और भिजवाने का टेंडर केंद्रीय सप्लाई एंड डिस्पोजल के महानिदेशक जारी करते हैं।
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उन्होंने 2600 गांठें (65000 बोरियां) सप्लाई करने का टेंडर कानपुर के जेके जूट मिल को दिया था। मिल ने 1300 गांठें जनवरी और 1300 गांठें मार्च में भेजीं।

उनके पास जेके जूट मिल मजदूर एकता यूनियन के प्रतिनिधि ने 18 मार्च को पेश होकर बताया कि मिल प्रबंधन ने जो 1300 गांठें भेजी हैं, वे कोलकाता से 6 रुपये प्रति बोरी खरीदी हैं और अब हैफेड को 60 रुपये से ज्यादा रेट में भेजी गई हैं।

मिल ने ये बोरियां तैयार नहीं की हैं और भेजी गई बोरियां पुरानी हैं। इस पर, प्रबंध निदेशक अशोक यादव ने हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के महानिदेशक अरुण कुमार गुप्ता को तुरंत मामले की जानकारी दी, जिन्होंने तीन अफसरों की कमेटी गठित की।

कमेटी 18 मार्च को अंबाला रेलवे स्टेशन पहुंची और वहां पहुंची मालगाड़ी की 20 बोगियों से एक-एक बंडल निकालकर चेक किया तो सभी बोरियां दो से तीन साल पुरानी पाई गईं।
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इसकी सूचना तुरंत कोलकाता के सप्लाई एंड डिस्पोजल विभाग के महानिदेशक और जूट कमिश्नर को दी गई। साथ पुलिस को भी मामले की शिकायत दे दी गई।

हैफेड की ही बोरियां हैफेड को बेच दीं
हरियाणा में हर साल बोरियों की दो से तीन लाख गांठें खरीदी जाती हैं। जूट मिल मालिक संबंधित खरीद एजेंसी के फील्ड दफ्तर में सीधे माल भेजते हैं।

खरीद एजेंसियां गेहूं खरीद के समय आढ़तियों को और धान खरीद के समय राइस मिलरों को ये बोरियां देते हैं।

हैफेड ने जो पुरानी बोरियां पकड़ी हैं, वे पिछले सालों में हरियाणा की खरीद एजेंसियों को भेजी गई थी लेकिन उनमें अनाज नहीं भरा गया। वे बंद पैकेट की तरह वापस बेच दी गई जिन्हें जेके जूट मिल ने अब नई बताकर भेजा है।
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