गुल गुलशन गुलफॉम, हर हर महादेव (दुर्गुण) जैसे सीरियल में भूमिका निभाने वाले पंकज बेरी का सपना एक एक्सीडेंट ने तोड़ डाला। यह वही वक्त था जब पंकज बेरी को बॉलीवुड में हाटेस्ट विलेन कहा जाने लगा। उनके पास 27 फिल्में थी जिनमें उनको विलेन का किरदार मिला। लेकिन एक एक्सीडेंट ने उनके सपने चकनाचूर कर दिए।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में हुई मुलाकात में पंकज बेरी ने कहा कि वर्ष 1992 में ‘सैनिक’ फिल्म के बाद उनकी पहचान विलेन के रूप में हो गई थी। करीब 27 फिल्मों से विलेन के ऑफर आए। इसी बीच उनका एक्सीडेंट हो गया। उनका बॉलीवुड में विलेन के रूप में पहचान बनाने का सपना अधूरा रह गया।
पंकज बेरी ने कहा कि जब ठीक हुए तो टीवी सीरियल, फिल्मों में फिर से दिखाई दिए लेकिन वक्त तब तक निकल चुका था। उन्होंने बताया कि अब बॉलीवुड में विलेन की कमी है। कभी नायक रहे स्टार को ही विलेन के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है।
अगर पिछला दौर देखें तो जीवन, अमरीश पुरी, प्राण, प्रेम चोपड़ा जैसे कलाकारों ने खलनायक के रूप में अलग पहचान बनाई। अब ऐसा नहीं रह गया है। पंकज बेरी ने बताया कि क्या फर्क पड़ता है में उनकी भूमिका नायक के भाई की है।
पंकज बेरी ने कहा कि उनका ड्रीम एक ऐसे खलनायक का रोल करना है जो लंबे समय तक याद किया जाए। जैसे अमजद खान को गब्बर सिंह, कुलभूषण खरबंदा को शाकाल और अमरीश पुरी को मोगेंबो के रूप में याद किया जाता है।