चंडीगढ़। पीजीआई में 2022 में शुरू हुआ ह्यूमन मिल्क बैंक आज हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है। इस पहल ने अब तक 1600 से अधिक बीमार और समय से पहले जन्मे शिशुओं को सुरक्षित, पाश्चराइज्ड डोनर मिल्क उपलब्ध कराया है। 1700 से ज्यादा माताओं ने स्वेच्छा से अपना दूध दान कर मानवता की मिसाल पेश की। इस दौरान 1000 लीटर से अधिक मानव दूध एकत्रित किया गया, जिसमें से 900 लीटर से ज्यादा नवजात शिशुओं तक पहुंचाया गया। ये आंकड़े केवल संख्या नहीं बल्कि उन नन्हीं जिंदगियों की कहानी हैं जिन्हें समय पर मिला मां का पोषण जीवन की नई शुरुआत दे सका। वैलेंटाइन डे पर पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में ह्यूमन मिल्क बैंक अपनी चौथी वर्षगांठ मनाएगा। यह सिर्फ एक सालगिरह नहीं, बल्कि उन 1600 से अधिक नन्हीं जिंदगियों का जश्न है जिन्हें मां के दूध ने नई शुरुआत दी। वेलेंटाइन डे पर जब लोग गुलाब और उपहारों से प्यार जताएंगे, तब पीजीआई का यह आयोजन याद दिलाएगा कि प्यार का सबसे सच्चा रूप वह है, जो किसी अजनबी बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए अपना हिस्सा दे दे।
मिल्क बैंक की प्रभारी डॉ. कन्या मुखोपाध्याय कहती हैं कि यह उपलब्धि दानदात्री माताओं की अटूट संवेदनशीलता और मेडिकल टीम की प्रतिबद्धता का परिणाम है। उनका कहना है कि दूध सिर्फ पोषण नहीं, समय से पहले जन्मे या बीमार शिशु के लिए दवा है। कई बार समय से पहले जन्म, मां की गंभीर बीमारी, सर्जरी, प्रीक्लेम्पसिया जैसी जटिलताएं या जरूरी दवाइयां स्तनपान में बाधा बन जाती हैं। एनआईसीयू में भर्ती बच्चे और मां के बीच की शारीरिक दूरी भी दूध बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में यही मिल्क बैंक उस बच्चे के लिए मां के आंचल का विकल्प बनता है। दान करने वाली हर स्वस्थ स्तनपान कराने वाली मां को सख्त स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। हेल्थ हिस्ट्री और ब्लड टेस्ट के बाद ही दूध स्वीकार किया जाता है, ताकि वह पूरी तरह सुरक्षित हो।