ट्राईसिटी में पहली फ्री लैप्रोस्कोपिक रिपेयर सर्जरी हुई है मोहाली में। पटियाला निवासी महिला की ये सर्जरी मोहाली में हुई है। महिलाओं में पाई जाने वाली एक और जानलेवा बीमारी का इलाज अब ओपन सर्जरी के बिना संभव हो गया है। मोहाली में एक नामी अस्पताल ने ये संभव कर दिखाया है।
ये बीमारी है वीवीएफ (वेसिको वेजाइनल फिस्टुला) यानी एक ऐसी बीमारी जिसमें ब्लॉडर पंक्चर हो जाता है और यौनी या वेजाइना के साथ सीधे संपंर्क में आ जाता है, और महिला को लगातार यूरीन लीकेज की बीमारी हो जाती है।
जनवरी 2015 में अंबाला के एक निजी अस्पताल से वीवीएफ यानी ब्लॉडर पंक्चर का शिकार हुई पटियाला की सविता (काल्पनिक नाम) भी गैर जरूरी हिस्टेरेक्टमी की शिकार हुई हैं।
डॉ. वीरेंदर धनकर ने बताया कि उन्होंने मरीज पर अप्रैल में निशुल्क एडवांस्ड लैप्रोस्कोपी तकनीक द्वारा वीवीएफ (वेसिको वेजाइनल फिस्टुला रिपेयर) सर्जरी द्वारा पंक्चर ब्लॉडर को ठीक किया। जिसके बाद महिला को यूरीन लीकेज की दिक्कत से निजात मिली।
यह ट्राईसिटी की पहली सर्जरी है जिसमें मरीज का बिना ओपन सर्जरी के बिना इस बीमारी से निजात मिल पाई है। साथ में मरीज की रिक्वरी भी तेजी से होती है।
अस्पताल के विशेषज्ञ डाक्टर डॉ. राजेश गुलिया ने बताया कि तत्कालीन दाइयों द्वारा किए जा रहे प्रसूति के दौरान काफी लंबे समय व अव्यवस्थित लेबर मिसमेनेजमेंट प्रसव की वजह से यूट्रेस के ऊपर ब्लॉडर पंक्चर हो जाता था।
ब्लॉडर पंक्चर की वजह से घायल हुए टिश्यू को ठीक होने में 6-8 सप्ताह लगते हैं। यानी महिला को कम से कम दो से तीन माह तक लगातार यूरीन लीकेज की दिक्कत हो जाती है। जन जननी प्रोग्राम के बाद वीवीएफ के केसों में काफी गिरावट आ गई थी लेकिन अब इन केसों में फिर से बढ़त देखी जा रही है।
मरीज सविता ने बताया कि अस्पताल में सर्जरी कराने से पहले 24 घंटे यूरीन लीकेज की दिक्कत के कारण मैं पटियाला अपने घर तक नही जाना चाहती थी। मैं न अपने बच्चों से मिली न ही किसी परिजन से। अब मैं ठीक हूं।