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Chandigarh News: एक साथ जलीं तीन चिताएं... आखिरी बार पति और बेटियों का चेहरा तक नहीं देख पाईं लक्ष्मी

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चंडीगढ़। बड़े भाई प्रोफेसर संदीप और दो मासूम भतीजियों परी (6) और खुशी (10) की चिता को अग्नि देने पहुंचे सुशील कुमार की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। रोते हुए जब उन्होंने तीन चिताओं को मुखाग्नि दी तो श्मशान घाट में माैजूद लोगों का कलेजा मुंह को आ। सभी की आंखें नम हो गईं। पीजीआई में जिंदगी और माैत की जंग लड़ रहीं प्रो. संदीप की पत्नी लक्ष्मी आखिरी बार पति व दोनों बेटियों का चेहरा तक नहीं देख पाईं। शनिवार रात दिल्ली-अंबाला नेशनल हाईवे-44 पर चलती अर्टिगा कार में अचानक आग लगने से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (सीयू) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डाॅ. संदीप (37) और उनकी दो बेटियों परी व खुशी की कार में जलकर मौत हो गई थी। हादसा कुरुक्षेत्र (हरियाणा) के शाहाबाद क्षेत्र के गांव मोहड़ी में हुआ था। हादसे में कार में सवार प्रो. संदीप की पत्नी लक्ष्मी, मां सुदेश और भाभी आरती भी झुलस गए थे, जिन्हें गंभीर हालत में पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया था। सोमवार को घायल आरती को डिस्चार्ज कर दिया गया जबकि प्रोफेसर की पत्नी व मां की हालत अभी नाजुक बनी हुई है। सोमवार सुबह प्रो. संदीप और उनकी दोनों बेटियों के शवों को जीएमएसएच-16 के शवगृह से सुबह साढ़े नाै बजे पहले सेक्टर-7 स्थित आवास पर ले जाया गया जहां परिजनों व रिश्तेदारों ने तीनों मृतकों के अंतिम दर्शन किए। यहां से दोपहर 12 बजे तीनों शवों को सेक्टर-25 के श्मशान घाट ले जाया गया। श्मशान घाट में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। मृतक प्रो. संदीप के भाई सुशील कुमार व उनका बेटा यश रोते-बिलखते यहां पहुंचे। सुशील के बाएं हाथ में पट्टी बंधी हुई थी। हादसे में वह भी चोटिल हुए हैं। सुशील की रो-रोकर हालत काफी खराब हो गई थी। रोते हुए वह बस यही बोल रहे थे कि उनका सबकुछ लुट गया। अब वह अपने परिवार के फैसले किसके साथ बैठकर करेंगे। अपना सुख-दुख अब किसके साथ साझा करेंगे। बता दें कि प्रोफेसर संदीप और उनके भाई का परिवार दिवाली मनाने के लिए सोनीपत स्थित अपने पैतृक गांव रहमाणा गया था। वहां से शनिवार रात पूरा परिवार अर्टिगा कार में सवार होकर चंडीगढ़ सेक्टर-7 लाैट रहा था। इसी बीच हादसा हो गया। हादसे में घायल प्रो. संदीप की पत्नी लक्ष्मी और मां की हालत में अभी कोई सुधार नहीं हुआ है। दोनों का पीजीआई में ही इलाज चल रहा है। सोमवार को अंतिम संस्कार से पहले जब पिता व बेटियों के शवों को घर ले जाया गया तो वहां मौजूद लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। प्रोफेसर की पत्नी पीजीआई में दाखिल होने के कारण अंतिम संस्कार से पहले अपने पति व दोनों बेटियों का चेहरा भी आखिरी बार नहीं देख पाईं। प्रोफेसर की मां को तो अभी तक होश भी नहीं आया है। प्रोफेसर संदीप के पिता सुरेंद्र की चंडीगढ़ उपायुक्त कार्यालय में नाैकरी लगने पर पूरा परिवार करीब साढ़े तीन दशक पहले गांव रहमाणा से आकर चंडीगढ़ सेक्टर-7 में बस गया था लेकिन गांव से परिवार का गहरा नाता था। परिवार के सदस्य गांव जाकर हर त्योहार मनाते थे। करीब एक दशक पहले सुरेंद्र के बड़े बेटे संदीप को चंडीगढ़ विवि में प्रोफेसर की नौकरी मिली थी। संदीप की शादी सोनीपत के गांव खांडा की लक्ष्मी से हुई थी। लक्ष्मी ने खानपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी की शिक्षा ग्रहण की थी। वह भी चंडीगढ़ हाईकोर्ट में वकालत करती हैं।
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