चंडीगढ़। देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) की तरफ से चंडीगढ़ में ‘ट्री मैपिंग’ की जा रही है। वर्ष 2022 में सेक्टर-9 के स्कूल में पेड़ गिरने के हादसे के बाद बनी कमेटी ने शहर में ट्री मैपिंग की सिफारिश की थी। एफआरआई ने नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में ट्री मैपिंग का काम लगभग पूरा कर लिया है। इसके बाद यूटी प्रशासन के पेड़ों की मैपिंग शुरू की जाएगी। टीम नवंबर में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
ट्री मैपिंग एक ऐसा प्रोसेस है जिसमें पेड़ों को प्लांट करने, उनकी देखभाल करने और उनकी निगरानी करने के लिए डाटा कलेक्ट किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता को बढ़ावा देना और पेड़-पौधों की सही तरीके से देखभाल करना है। ट्री मैपिंग के दौरान पेड़ों की लोकेशन, उनकी प्रजाति, उम्र, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके लिए जीपीएस, जीआईएस और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि पेड़ों की सटीक जानकारी प्राप्त हो सके। ट्री मैपिंग के अलावा आधुनिक भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) तकनीक का उपयोग करके शहर के सभी पेड़ों की जियो-टैगिंग भी की जा रही है। जानकारी के अनुसार इस वर्ष नवंबर में रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सकती है। यूटी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एफआरआई ने नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में ट्री मैपिंग का काम लगभग पूरा कर लिया है और सामुदायिक केंद्र और ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ों की मैपिंग की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि यूटी में पेड़ों की स्थिति का पता लगाने के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण अभ्यास है।