किडनी पैरासाइटिक ट्यूमर के इलाज के लिए पीजीआई के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संतोष कुमार ने एक अद्भुत तकनीक ईजाद की है।
दुनिया में ऐसी रेयर सर्जरी अभी तक नहीं हुई है। नाभि से इलाज करने पर मरीज के पेट में कोई बड़ा चीरा भी नहीं लगाना पड़ा और किडनी भी सुरक्षित रही।
यह तकनीक काफी सस्ती है और इससे आम आदमी भी इलाज करा सकता है। प्रोफेसर संतोष की इस तकनीक को एशियन जरनल ऑफ एंडोस्कोपी सर्जरी ने प्रकाशित किया है।
प्रोफेसर ने इस सर्जरी का नाम संतोष पीजीआई तकनीक नाम दिया है। यूरोलॉजी के प्रोफेसर संतोष कुमार ने बताया कि नाभि से पहले भी छोटे-छोटे इलाज होते रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी सर्जरी पहली बार हुई है।
ऐसे निकाला ट्यूमर
प्रोफेसर संतोष के मुताबिक मरीज विवाहिता को प्राइवेट अस्पताल ने सर्जरी के दौरान किडनी निकालने की बात कही थी।
उन्होंने उसकी नाभि में लेप्रोस्कॉपी में यूज होने वाला यंत्र डाला और ऑपरेट करना शुरू किया। करीब 90 मिनट बाद आसानी से ट्यूमर को बाहर निकाल दिया। किडनी के साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं करनी पड़ी।
जानवरों से फैलता है पैरासाइटिक ट्यूमर
प्रो. संतोष कुमार के मुताबिक पैरासाइटिक ट्यूमर भेड़, बकरी, कुत्ते और अन्य जानवरों से फैलता है। जानवर से यह सब्जियों और फल में आता।
उसके बाद इंसान में खून की नली से लीवर, फेफड़े और किडनी में चला जाता। यह किडनी को नष्ट भी कर सकता है। इससे सीटी स्कैन और एमआरआई से डायग्नोज किया जाता है।
ओपन सर्जरी के दौरान पूरे पेट में चीरा लगाना पड़ता है। ट्यूमर होने से पेट में रसौली से गांठ पड़ जाती है और पेट में दर्द होने लगता। इसका एक लक्षण चेहरे पर सूजन और खुजली होने लगती है। यदि यह फट जाए तो जान भी जा सकती है।
पीजीआई में यूरोलॉजी के प्रोफेसर संतोष कुमार ने बताया कि यह बहुत ही रेयर सर्जरी है। पहली बार इतने बड़े ऑपरेशन में नाभि का इस्तेमाल किया गया है।
इससे मरीज की रिकवरी जल्दी होती है और कम खर्च में बेहतर इलाज हो सकता है।