एक भी पैसा पहले नहीं, पूरी फीस स्टडी वीजा मिलने के बाद... पे आफ्टर वीजा, सारा पैसा वीजा लगने के बाद... पहले आओ पहले पाओ यूके का स्टडी वीजा...कोरोना काल में ऐसे विज्ञापनों ने सोशल मीडिया पर और शहरों में धूम मचा रखी है।
यूके का वीजा आवेदन सेंटर क्या खुला, स्टडी वीजा के नाम पर मोटा पैसा ऐंठने वाले एजेंटों ने दुकानें सजा ली हैं। आलम यह है कि एक विद्यार्थी पर 12 लाख खर्च करके 20-20 लाख वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं लोगों को जाल में फांसने के लिए वीडियो बनाकर वायरल किए जा रहे हैं कि बिना आईलेट्स के अगर अंग्रेजी में 50 फीसदी अंक हैं तो भी यूके का स्टडी वीजा लग सकता है जबकि यह नामुकिन है।
ऐसे खेला जा रहा है खेल.....
पे आफ्टर वीजा के नाम पर युवाओं को लूटा जा रहा है। विद्यार्थी इस चक्कर में फंस जाते हैं कि उनको जेब से पैसा नहीं खर्च करना पड़ेगा, सब कुछ एजेंट लगा देता है। यूके में एक स्टूडेंट की सालाना फीस 12 लाख के करीब होती है। एजेंट आधी फीस छह लाख ही भरते हैं।
इसके अलावा 70 हजार रुपये दूतावास की फीस, 80 हजार इंश्योरेंस और 50 हजार एयर टिकट का खर्च किया जाता है। इसके अलावा स्टूडेंट के खाते में एजेंट अपने पास से पैसा जमा करवाकर एबेंसी को भेजते हैं कि आवेदनकर्ता के पास पर्याप्त फंड है। कुल मिलाकर 10 से 12 लाख के बीच खर्च आता है, लेकिन एजेंट वीजा लगवाकर 20-20 लाख रुपये तक वसूल रहे हैं।
10 साल पहले यूके ने बंद कर दिया था स्टडी वीजा
अब से पहले 2007-08 में यूके ने स्टडी वीजा खोला था। तब भी पंजाब के एजेंटों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके बड़ी संख्या में युवकों को स्टूडेंट बनाकर यूके भेज दिया था। उनकी इसी करामात के कारण वहां की सरकार ने वीजा बंद कर दिया था और 10 साल तक ओपन नहीं किया।
पिछले साल यूके ने दोबारा स्टडी वीजा ओपन किया तो एजेंटों ने चांदी कूटनी शुरू कर दी। हालात यह थे कि स्टूडेंट्स की 50 फीसदी फीस अदा करके उनको यूके भेज दिया गया। जब यूके के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी ने दोबारा फीस मांगी तो स्टूडेंट्स स्टडी छोड़कर भाग निकले।
स्टडी वीजा के लिए यूके द्वारा इतनी राहत दी गई थी कि वहां जाने के लिए आईलेट्स की जरूरत नहीं है। यूके के जीसीयू, मिडल सेक्स, वोल्वर हैंप्टन व बॉलटन यूनिवर्सिटी शिक्षण संस्थानों में स्टडी वीजा जारी किया था। पंजाब के युवाओं में यूके जाने का क्रेज है। इसी का फायदा एजेंटों ने उठाया।
एजेंटों ने विद्यार्थियों के नाम पर 20-20 लाख रुपये वसूलकर यूनिवर्सिटी में हजारों एडमिशन करवाए। पंजाब से स्टडी वीजा पर करीब 5 हजार युवक यूके पहुंच गए। इससे पहले की विद्यार्थी दूसरे सेमेस्टर की फीस भरते करीब 3 हजार स्टूडेंट भाग निकले। वोल्वर हैंपटन यूनिवर्सिटी का तो हाल बेहाल हो गया, वहां पर नाम मात्र बच्चे ही रह गए।
कुछ लोगों को मकसद सिर्फ पैसा कमाना
एसोसिएशन ऑफ ओवरसीज कंसल्टेंट एजुकेशन के प्रधान जसपाल सिंह का कहना है कि विदेशी एजुकेशन इंडस्ट्री में काफी लोग ऐसे घुस आए हैं जिनका मकसद पैसा कमाना है। बच्चों की फीस कम अदा कर एजेंट अपनी जेबें भर रहे हैं। हम ऐसे एजेंटों के बारे में बच्चों को जागरूक करने की तैयारी कर रहे हैं। बच्चों को चाहिए कि वह कॉलेज की फीस की रसीद और तमाम खर्चों पर पूरी नजर रखे। इसके लिए बच्चों में जागरूकता अभियान भी चलाने जा रहे हैं।
यूके में कुछ एजेंटों के कारण परेशानी हुई
स्टडी अब्बार्ड कंस्लटेंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रधान मितेश मल्होत्रा का कहना है कि यूके जाने वाले बच्चोें को जागरूक रहना चाहिए। जिस भी एजेंट के पास जाते हैं उसके द्वारा खर्च पैसे का ब्यौरा लेना चाहिए। एजेंट ने साल की फीस अदा की है या छह माह की है। पिछले साल भी यूके में जाकर पंजाबी बच्चों को काफी दिक्कत आई थी।