-एक ही दिन में दो बार तबादलों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी
- जातिगत समीकरणों को भी बताया जा रहा आधार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में वित्तायुक्त और गृह सचिव के एक ही दिन में दो बार हुए तबादले ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन तबादलों को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। इसे जातिगत समीकरणों से जोड़ा जा रहा है, जबकि कुछ लोग इसे सीएमओ में हुई लॉबिंग का परिणाम बता रहे हैं। कारण कुछ भी रहा हो, एक ही दिन में दो बार जारी हुई सूची में टीवीएसएन प्रसाद सबसे पावरफुल अधिकारी बनकर उभरे हैं, क्योंकि वित्तायुक्त होने के नाते प्रदेश के सभी डीसी और गृह सचिव के नाते सभी एसपी उनके अधीनस्थ होंगे। जबकि एसीएस सुधीर राजपाल के जिम्मे आई गृह सचिव की कुर्सी चंद ही घंटों में वापस ले ली गई।
रविवार दोपहर 2 बजे प्रदेश सरकार ने 9 आईएएस अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए। वरिष्ठता के आधार पर 1988 बैच के आईएएस टीवीएसएन प्रसाद को वित्तायुक्त नियुक्त किया गया और साथ ही सहकारिता विभाग और हरियाणा भवन दिल्ली के स्थानीय आयुक्त की भी जिम्मेदारी दी गई। वहीं, 1990 बैच के आईएएस सुधीर राजपाल को गृह सचिव नियुक्त किया गया था। तबादला सूची जारी होने के बाद से ही मुख्यमंत्री कार्यालय में माथापच्ची शुरू हो गई। इसके बाद करीब आठ घंटे तक चली जबरदस्त लॉबिंग ने सूची बदलवाने की पटकथा लिख दी। मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल तक पहुंचा। जातिगत समीकरणों समेत तमाम तर्क दिए गए और मुख्यमंत्री भी सूची बदलने को तैयार हो गए। बताया जा रहा है कि अहम पदों पर एक ही जाति वर्ग के अधिकारियों के तैनात होने से गलत संदेश न जाए, इसलिए तबादला सूची बदलनी जरूरी समझी गई।
रात दस बजे मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद मुख्य सचिव की ओर से एक बार फिर दोनों अधिकारियों को लेकर नई सूची जारी की गई। इसमें आईएएस टीवीएसएन प्रसाद को वित्तायुक्त के साथ गृह सचिव बना दिया गया, जबकि सुधीर राजपाल को स्कूल शिक्षा और सहकारिता विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया है।
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दोनों तबादला सूची की विज को दी गई जानकारी
सूत्रों का दावा है कि मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास पहुंचा और उन्हें इस बारे में बताया गया तो वह भी इस बात से सहमत दिखे। सूत्रों का ये भी दावा है खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सुधीर राजपाल को गृह सचिव लगाने और बाद में उनसे विभाग वापस लेने की जानकारी गृह मंत्री अनिल विज को दी। अनिल विज ने दोनों ही फैसलों पर कोई आपत्ति नहीं जताई।