हरियाणा के पांच स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे का दर्जा मिलने के बाद भी करीब नौ महीनों तक वाहन मालिकों से टोल वसूली की गई। इससे निर्माण कंपनियों को करीब 29.31 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हुई। नियंत्रक महालेखापरीक्षक ने इस मामले को उठाया है। कैग की ओर से कहा गया है कि फरवरी से दिसंबर, 2014 तक प्रदेश के पांच राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वूसली जारी रखने के कारण आम लोगों को आर्थिक तौर पर नुकसान का सामना करना पड़ा।
हरियाणा मैकेनिकल व्हीकल (टोल उद्ग्रहण) अधिनियम-1996 के तहत प्रावधान है कि अगर एक बार किसी स्टेट हाईवे को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिया जाता है, तो वहां से गुजरने वाले या किसी टोल सुविधा का उपयोग करने वाले किसी भी मैकेनिकल वाहन पर टोल चार्ज नहीं किया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग चूंकि संघ सूची में है, लिहाजा इस संबंध में कोई भी कानून बनाने का संसद को विशेषाधिकार है। कंपनी स्टेट हाईवे का विकास करती है और समय-समय पर प्रदेश सरकार के निर्देशों के मुताबिक टोल एकत्रित करती है।
हरियाणा में सड़क निर्माण करने वाली कंपनियों की ओर से विकसित पांच राज्य राजमार्गों पर पांच टोल प्वाइंट पर खुद या ठेकेदारों की ओर से टोल एकत्र किया गया। पांच टोल की वैधता अप्रैल 2014 से फरवरी 2016 के बीच थी। अनुबंध की शर्तों के मुताबिक कंपनी 15 दिन का नोटिस जारी करने के बाद कोई कारण बताए बगैर किसी भी समय अनुबंध को खत्म कर सकती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हरियाणा के पांच स्टेट हाईवे को 4 मार्च, 2014 को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिया, लेकिन दिसंबर तक इन टोल प्वाइंट्स पर टोल चार्ज किया गया।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि कंपनियों ने अधिनियम का उल्लंघन किया। इसके तहत उन्होंने 25 दिसंबर 2014 तक इन सड़कों से टोल वसूलना जारी रखा। प्रबंधन ने जवाब दिया कि जून 2015 तक वित्त विभाग की सहमति तथा मंत्री परिषद के अनुमोदन के बिना अधिसूचित टोल प्वाइंट्स पर टोल के संग्रहण को बंद नहीं किया जा सकता था। कंपनियों की ओर से दिए गए तर्क को खारिज करते हुए कैग ने कहा कि मार्च 2014 में राष्ट्रीय राजमार्गों की घोषणा के बाद भी टोल वसूली न करने के लिए पहल में देरी की गई। पांचों टोल के निरस्तीकरण के लिए अनुमोदन में देरी हुई और इस संबंध में कैग ने संबंधित विभाग से भी जवाब मांगा, लेकिन जनवरी 2016 तक सरकार की ओर से इस मामले में कोई जवाब नहीं आया।
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मामले से जुड़े हाईवे
गुड़गांव-सोहना, सोहना-नूंह-फिरोजपुर झिरका-अलवर हाईवे, यूपी बॉर्डर-सोनीपत गोहाना हाईवे, बहादुरगढ़ -सिरसा हाईवे और नारनौल-सिंघाना हाईवे