-पत्नी का जरूरतें ज्यादा बताना और पतियों का आमदनी छुपाना बढ़ा रहा अदालतों की मुश्किलें: हाईकोर्ट
-पति की याचिका को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता 15 हजार से किया 8 हजार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जींद की फैमिली कोर्ट द्वारा 15 हजार रुपये गुजारा भत्ता तय करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह कमजोर साथी को अभाव से बचाने के लिए है, इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं करने दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने पति की याचिका को मंजूर करते हुए अंतरिम गुजारा भत्ता 15 हजार रुपये से घटाकर 8 हजार रुपये करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पति ने एडवोकेट प्रांशुल ढुल के माध्यम से बताया कि उसका विवाह 26 फरवरी 2020 को हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच रिश्ता बिगड़ता चला गया और पत्नी ने उसके खिलाफ केस डाल दिया। याची ने बताया कि घरेलू सिंह के मामले में अदालत पहले ही पत्नी के लिए गुजारा भत्ता तय कर चुकी है। इसके बाद अब हिंदू मैरिज एक्ट में उसे 15 हजार रुपये प्रतिमाह पत्नी को अंतरिम गुजारा भत्ता जारी करने का आदेश दिया गया है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ज्यादा गुजारा भत्ता पाने के लिए पत्नियों द्वारा अधिक जरूरतें बताना और पतियों का गुजारा भत्ता से बचने के लिए आय कम दिखाना आम बात हो गई है। ऐसा करना अदालतों के लिए मुश्किल खड़ी कर देता है क्योंकि हमें दोनों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। अदालत को यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि गुजारा भत्ता अभाव से बचाने का माध्यम बने न की दूसरे साथ के लिए इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाए। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट में तय 15 हजार रुपये में से घरेलू हिंसा मामले में तय 7 हजार रुपये गुजारा भत्ता की कटौती करने का आदेश दिया है।