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पंजाबियों के रंग में रंगे हरियाणा के सीएम

Tue, 04 Mar 2014 10:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
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सेक्टर-5 स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में सोमवार को पंजाबी एकता मंच की तरफ से आयोजित पंजाबी मिलन समारोह में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी पंजाबी रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने पगड़ी भी पहनी और पंजाबी में भाषण भी दिए।
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पंजाबी समाज द्वारा मुख्य अतिथि सीएम और विशेष अतिथि राज्यसभा सांसद शादी लाल बत्रा को पगड़ी पहनाकर सम्मानित करने के बाद समाज की तरफ से दो मांगें रखी गईं।

पहली, पंजाबी भवन बनाने के लिए जगह दी जाए और दूसरी, स्थानीय पंजाबी को चुनाव में टिकट दिया जाए।

भवन की जगह के मुद्दे पर सीएम ने नियमों के तहत मांग पूरी करने का भरोसा दिलाया, जबकि टिकट की मांग और अंबाला शहर के विधायक विनोद शर्मा के बारे में चल रही चर्चाओं के मामले पर चुप्पी साध गए। हालांकि, जाते-जाते मंच के पंजाबी एकता मंच के सदस्यों से कह गए- ‘टिकट लेकर ही मानोगे’।
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सूत्रों का कहना है कि सीएम ने मंच के पदाधिकारियों के साथ कमरे में भी बातचीत की और हुडा के आला अधिकारियों को पंजाबी भवन के लिए जगह की कार्रवाई शुरू करने के लिए कहा।

उधर, इस सम्मेलन में कालका विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस नेत्री मनवीर कौर गिल के नेतृत्व में पंजाबी समुदाय के लोग शामिल हुए थे।

पाक यात्रा में मिल सकती है रियायत
हुड्डा ने कहा कि देश के विभाजन के समय भारत आए पंजाबियों को वीजा नियमों में रियायत होने के बाद उन्हें पुश्तैनी गांव देखने के लिए उनकी सरकार मुफ्त में पाकिस्तान भेजेगी।

वर्तमान में भारत की पाकिस्तान के साथ वीजा में कुछ रियायत संबंधी बातचीत चल रही है। इसके तहत जिनका जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वह अपने पुराने घर को देखना चाहते हैं, उनके लिए एक विशेष नीति बनाकर उन्हेें पाक स्थित अपने घर देखने के लिए मुफ्त में ले जाया जाएगा।      

हमें अब हक चाहिए
शादीलाल बत्रा ने कहा कि पंजाबियों ने बहुत कुर्बानियां दी हैं। हम सब कुछ लुटने के बाद फिर से स्थापित हुए हैं। जितना हमारी बिरादरी का अधिकार है, उतना हमें नहीं मिला।

बत्रा ने कहा कि अब हमें भी हक चाहिए। राजनीति में भी पंजाबी कौम को हक दिया जाए।

बंसल की मौजूदगी में रावल ने कहा- स्थानीय पंजाबी को टिकट दें
नगर परिषद के पूर्व प्रधान रविंद्र रावल ने पंजाबी एकता मंच की तरफ से मांग उठाई कि पंचकूला में पंजाबी समाज के लिए कोई भवन नहीं है।

सेक्टर-15 में करीब डेढ़ एकड़ जमीन पड़ी है। यह पंजाबी समाज को दी जाए। उन्होंने स्थानीय पंजाबी को टिकट देने की मांग भी उठाई।

खास बात यह है कि इस दौरान स्थानीय विधायक डीके बंसल भी मंच पर ही मौजूद थे। इस मांग के बाद पूरे ऑडिटोरियम में पंजाबी समाज के नारे लगे तो एक वर्ग विशेष के चेहरों के भाव ही बदल गए।

हालांकि, कमरे में पंजाबी समुदाय से हो रही बातचीत के बीच सीएम ने कहा कि खुले मंच से इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए।

एकजुट रहोगे तो ज्यादा तरक्की करोगे...
अपने भाषण में सीएम ने पंजाबी स्टाइल अपनाया। हुड्डा ने कहा कि पंजाबी बोलने की कोशिश कर रहा हूं। रोहतक की गांधी कालोनी के नजदीक रहता हूं और यह कालोनी पंजाबियों का गढ़ है।

पंजाबियों ने हमें कपड़े पहनना और खाना सिखाया है। इसलिए मुझे जो पगड़ी पहनाई है, उसका मान रखूंगा। उन्होंने पंजाबी समाज को नसीहत देते हुए कहा कि एकजुट रहोगे तो ज्यादा तरक्की करोगे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के राजनैतिक सलाहकार प्रो. वीरेंद्र, पूर्व एमसी प्रधान मनवीर कौर गिल, पंजाबी एकता मंच के चेयरमैन वीके कपूर, वाइस चेयरमैन बीएम तलवार, जनरल सेक्रेटरी सुभाष कपूर, तरुण भंडारी, संजय आहूजा भी मौजूद रहे।

आयोजन स्थल की किलेबंदी
सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब तक पंचकूला में रहे, तब तक जिला प्रशासन टेंशन में रहा। पंचकूला की पुलिस तो सुरक्षा में तैनात थी ही, अंबाला अर्बन व रूरल से भी पुलिस अधिकारी कार्यक्रम में पहुंचे थे।

कमिश्नर अजय सिंघल, डीसीपी अश्विन शेणवी के अलावा अंबाला रूरल से एसीपी स्तर के अधिकारी भी सुरक्षा में तैनात थे। समारोह स्थल की किलेबंदी की गई थी।

इसलिए थी कड़ी सुरक्षा
शिक्षा सदन के बाहर पिछले कई दिनों से अनशन पर बैठे कंप्यूटर अध्यापकों पर भी संदेह था कि वे सीएम का घेराव कर सकते हैं।

इनमें बैठे दीपक की तबीयत खराब हो गई। उनका ब्लड प्रेशर काफी लो हो गया था। इसलिए उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। इसलिए शिक्षा सदन के बाहर भारी पुलिस बल जुटा रहा।

लैब अटेंडेंट भी धरने पर
हरियाणा के विभिन्न स्कूलों में तैनात लैब अटेंडेंट भी शिक्षा सदन के बाहर धरने पर बैठ गए, जिन्हें दो साल से तनख्वाह नहीं मिली है।

इन कर्मचारियों ने शिक्षा सदन में घुसने का भी प्रयास किया, लेकिन लॉ एंड ऑर्डर के चलते पुलिस ने अंदर नहीं जाने दिया।

डिग्री लेने वालों का भी प्रदर्शन
डीम्ड यूनिवसर्टियों से डिग्री लेने वाले भी धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि डिग्रियों को अवैध बताकर नौकरी नहीं दी जा रही है, जबकि मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटियों से डिग्री की है।
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