जमीन विवाद को लेकर पिता की हत्या मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके बिश्नोई की अदालत ने तीन बेटों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
अदालत ने झिंवरेहड़ी निवासी दोषी बेटों रविदत्त , मुकेश और सुखविंदर सिंह पर छह-छह हजार रुपये जुर्माना किया। मामले की सुनवाई अदालत में छह महीने चली। जिसमें 13 लोगों ने अपने बयान दर्ज करवाएं थे।
थाना छप्पर पुलिस ने आठ जनवरी को गांव झिंवरहेड़ी के चौकीदार रामेश्वर की शिकायत पर रघुवीर की हत्या का केस दर्ज किया था। रामेश्वर ने पुलिस को दी शिकायत बताया था कि आठ जनवरी को वह खेतों में गन्ने की छुलाई कर रहा था।
इस दौरान सूचना मिली कि रघुबीर के साथ परिवार के कुछ लोग जमीन को लेकर झगड़ा कर रहे है। मौके पर पहुंचकर देखा तो रघुवीर खून से लथपथ पड़ा हुआ था। उसके हाथ पांव बांध कर तेजधार हथियार से हमलाकर हत्या की वारदात को अंजाम दे रखा था। वहां पर गांव के अन्य लोगों की भीड़ जमा थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने रघबीर के हत्यारोपी उसके तीन बेटों को घटना स्थल से भागते देखा था। उन्होंने हत्या की सूचना थाना छप्पर पुलिस को दी थी।
सूचना मिलते ही पुलिस ने घटना स्थल पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया और गांव के चौकीदार रामेश्वर की शिकायत पर मृतक के बेटे रविदत्त, मुकेश तथा सुखविंद्र सिंह के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने 9 जनवरी को तीनों हत्यारों को काबू कर कोर्ट में पेश किया था।
जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया। रिमांड के दौरान रविदत्त, मुकेश और सुखविंद्र ने पिता रघुवीर की हत्या को कबूल किया था। उन्होंने रिमांड के दौरान पुलिस केा बताया था कि जमीनी विवाद के चलते तीनों ने मिलकर कु ल्हाड़ी से पिता की हत्या की थी। पुलिस ने तीनों की निशानदेही पर कुल्हाड़ी तथा अन्य चीजों को बरामद किया था।