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जीएमएसएच-16 में चार आवेदकों में से तीन प्रतिबंधित, टेंडर पर उठे सवाल

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चंडीगढ़। शहर के सरकारी अस्पतालों में दवा की दुकान खोलने की योजना परवाज चढ़ी और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो गई लेकिन धीरे-धीरे हकीकत सामने आ रही है, जो स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को जांच के घेरे में खड़ा कर रही है। मामला जीएमएसएच 16 के शॉप नंबर 7 के टेंडर से जुड़ा है। इस दुकान को 17 लाख रुपये मासिक किराए पर टेंडर दिया गया है। इस फर्म को पीजीआई पहले ही प्रतिबंधित कर चुका है। वहीं अब दो अन्य आवेदकों के भी पीजीआई से प्रतिबंधित होने की पुष्टि हुई है। इससे जहां एक तरफ टेंडर की जांच कमेटी सवालों के घेरे में आ गई है, वहीं दूसरी ओर इस बात की चर्चा है कि टेंडर अलॉट किसे किया जाएगा क्योंकि जिन चार फर्मों को काफी जांच के बाद टेंडर के लिए नामित किया गया था उनमें से तीन तो प्रतिबंधित हैं। जो एक फर्म बची है उसे मानक के विपरीत जाकर टेंडर नहीं दिया जा सकता। स्वास्थ्य विभाग के ही अधिकारी और कर्मचारी पुन: प्रक्रिया की बात कर रहे हैं। उधर, सूत्रों का कहना है कि विभाग इकलौते आवेदक को टेंडर देने की तैयारी कर रहा है।
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चार में से तीन प्रतिबंधित, क्या खूब हुई जांच
चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य सचिव ने मानकों का हवाला देते हुए सस्ते दर पर बेहतर सुविधा के लिए दुकानों के टेंडर की प्रक्रिया शुरू की थी। उसके लिए कई चरण में जांच और बैठकों के बाद आवेदकों के नाम तय किए गए थे लेकिन हकीकत सामने आने पर स्थिति बेहद शर्मनाक हो गई है। कमेटी ने तमाम जांच के बाद जिन चार आवदेकों को टेंडर डालने की अनुमति दी उनमें से तीन प्रतिबंधित हैं।
स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रणाली पर पहले से सवाल
जीएमएसएच 16 की जिस दवा की दुकान के लीज रिन्युअल की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई जा रही है उसे हर बार स्वीकृति देने वाले विभाग के आला अधिकारी और कर्मचारी ही हैं। मामला उच्चाधिकारियों के सामने आ चुका है। उसके बावजूद जांच का झुनझुना थमाने का काम किया जा रहा है। अस्पताल परिसर में दुकान अलॉटमेंट में विभागीय कमेटी की जांच प्रक्रिया पर पहले से सवाल उठ चुके हैं। इस बार की टेंडर प्रक्रिया में प्रतिबंधित आवेदकों को स्वीकृति देने वाली कमेटी की कार्यप्रणाली का दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है।
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कोट-
टेंडर की प्रक्रिया के दौरान आवेदकों से शपथ पत्र लिए जाते हैं। उसमें गड़बड़ी सामने आने पर मानक के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
-यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव
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