चंडीगढ़। तीनों नए आपराधिक कानून एक जुलाई से चंडीगढ़ में लागू हो जाएंगे। पुलिस ने पूरी तैयारी कर ली है। नए कानूनों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को काफी महत्व दिया गया है। इसलिए सभी जांच अधिकारियों को टैबलेट, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क मुहैया कराई जा रही है। गवाही के लिए थाने आने की जरूरत नहीं होगी। शहरभर में पब्लिक वीडियो कांफ्रेंसिंग केंद्र बनाए जाएंगे जहां जाकर लोग वीसी से जुड़ सकेंगे। अगले कुछ दिनों में इसको लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दी जाएगी।
तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को लागू करने के लिए चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर ने सेक्टर-6 स्थित यूटी गेस्ट हाउस में पूरा रोड मैप बताया। इस मौके पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वकील दीपक बजाज भी उपस्थित रहे। एसएसपी ने बताया कि नवंबर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ को टारगेट दिया था। फरवरी में तय हो गया था कि एक जुलाई से कानूनों को लागू कर दिया जाएगा। चंडीगढ़ ने जनवरी से ही तैयारी शुरू कर दी थी। एसएसपी ने बताया कि उन्होंने खुद स्टूडेंट की तरह सभी कानूनों को पढ़ा। अब तक सभी जांच अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
नए कानूनों में कई बदलाव हैं। जो आरोपी, पीड़ित और गवाह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी गवाही देना चाहते हैं, उनके लिए शहर में पब्लिक वीसी केंद्र बनाए जाएंगे। इसमें डीसी ऑफिस, एसडीएम ऑफिस, अस्पताल, सभी पुलिस थाने, जेल और अदालत को चिह्नित किया गया है। यहां पहुंचकर कोई भी व्यक्ति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी गवाही दे सकता है। जल्द प्रशासन की तरफ से नोटिफिकेशन जारी की जाएगी।
क्राइम सीन, जांच, ट्रायल सभी चरणों में टेक्नोलॉजी का उपयोग
एसएसपी ने बताया कि नए कानूनों में टेक्नोलॉजी पर काफी जोर दिया गया है। इसमें एनसीआरबी और एनआईसी ने मदद की है। क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम को अपग्रेड किया गया है। किसी भी सर्च और सीजर की वीडियोग्राफी जरूरी है। इसके लिए ई-साक्ष्य एप बनाया गया है। जांच अधिकारियों को दिए टैबलेट में यह एप डाला गया है। वीडियो-फोटो जीआईएस टैगिंग के साथ रिकॉर्ड होगी। वीडियो की डिजिटल प्रॉपर्टी के साथ भी छेड़छाड़ संभव नहीं होगा। क्राइम सीन, जांच, ट्रायल सभी चरणों में टेक्नोलॉजी का उपयोग होगा। इससे सबूतों की गुणवत्ता में सुधार होगा और पीड़ित और आरोपियों दोनों के अधिकारों की रक्षा होगी। एफआईआर से केस डायरी, चार्जशीट व जजमेंट सभी डिजिटाइज्ड हो जाएंगे।
जो केस पुराने धाराओं में दर्ज, उन्हीं के अनुसार चलेंगे केस
30 जून तक पुरानी धाराओं में ही केस दर्ज होंगे। एक जुलाई के बाद भी जो केस पुरानी धाराओं में दर्ज किए जा चुके हैं, वे उन्हीं के अनुसार चलते रहेंगे। एक जुलाई के बाद होने वाले अपराध ही नए कानूनों के तहत दर्ज किए जाएंगे। एक सवाल के जवाब में एसएसपी ने कहा कि अगर कोई अपराध एक जुलाई से पहले हुआ है और मामला एक जुलाई के बाद दर्ज होता है तो अपराध घटित होने के दिन जो कानून थे, उन्हीं के तहत केस दर्ज होगा। बताया कि किसी भी पुलिस स्टेशन में ई-एफआईआर दर्ज की जा सकती है, चाहे उसका क्षेत्राधिकार कुछ भी हो। जीरो एफआईआर की सुविधा वर्तमान में भी है लेकिन अब यह कानून का हिस्सा हो जाएगा।
कानून दंड देने के लिए नहीं, न्याय के लिए बनाए गए
वकील दीपक बजाज ने कहा कि तीनों नए कानून के नाम से ही स्पष्ट है कि यह दंड देने के लिए नहीं बल्कि न्याय के लिए बनाए गए हैं। पुराने कानूनों में टेक्नोलॉजी पर बिल्कुल जोर नहीं था लेकिन अब इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस, फॉरेंसिक और साइंटिफिक एविडेंस को काफी ज्यादा अहमियत दी गई है। हर किसी की जवाबदेही और टाइमलाइन तय किया गया है ताकि न्याय मिलने में ज्यादा समय न लगे। नए कानून इस हिसाब से बनाए गए हैं कि दोषी बच न पाए और कोई मासूम गलत न फंस जाए।