दिल्ली में होने वाले वर्ल्ड फूड इंडिया के आयोजन से पहले चंडीगढ़ में इसके लिए रोड शो करने पहुंचीं केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल को हरियाणा और चंडीगढ़ का तो भरपूर साथ मिला, लेकिन पंजाब सरकार ने इस कार्यक्रम में अपने एक विशेष सचिव को भेजकर औपचारिकता भर निभाई।
कॉन्फेडेरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) परिसर में आयोजित सम्मेलन में हरियाणा की ओर से कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने शिरकत की, जबकि पंजाब की ओर से कोई मंत्री कार्यक्रम में नहीं पहुंचा। पंजाब सरकार की ओर से विशेष सचिव विकास गर्ग ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जबकि इसमें हरियाणा के अलावा पंजाब से आए कई किसान मौजूद रहे।
बात दें कि पंजाब के कृषि मंत्री का कार्यभार मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास है, वहीं ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के जिम्मे हैं। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि उन्होंने पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों को निजी तौर पर पत्र लिखकर इस कार्यक्रम का न्यौता दिया था, ताकि दोनों राज्यों के किसान फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में केंद्रीय योजनाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि वे फूड प्रोसेसिंग स्कीमों का प्रचार करने के लिए खुद पंजाब के गांव-गांव जाएंगी। हरसिमरत ने बताया कि पंजाब को तीन और हरियाणा को दो मेगा फूड पार्क अलाट किए गए हैं। इसके अलावा पंजाब को 7 कोल्ड चेन भी अलाट किए गए हैं।
इसलिए कर रहे किसान आत्महत्या
Harsimrat Kaur Badal
हरसिमरत ने कहा कि यूपीए के कार्यकाल में 42 फूड पार्कों का ऐलान किया गया था, लेकिन उनमें से केवल दो पार्क ही चालू हुए। एनडीए ने सत्ता संभालने के बाद छह फूड पार्कों को चालू करवा दिया है और चार अन्य पार्क इस साल शुरू हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि उनके मंत्रालय ने फूड प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किसान संपदा योजना के तहत 6000 करोड़ रुपये के निवेश का फैसला किया है। इसके तहत किसानों को फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए तीन अलग-अलग योजनाओं के तहत 5-10 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।
इसलिए कर रहे किसान आत्महत्या
पंजाब में किसानों की लगातार आत्महत्याओं के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर हरसिमरत बादल ने कहा कि पंजाब की 100 दिन की सरकार में 100 किसानों की आत्महत्याएं, दुख होता है। बीते दस साल के दौरान कभी ऐसे आंकड़े नहीं देखे गए। यह सब झूठे वादों के कारण हुआ है। किसानों को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन सरकार बनने के बाद कांग्रेस ने कुछ नहीं किया।
जिन किसानों ने कांग्रेस की बातों में आकर कई महीनों से कर्ज की रकम पर ब्याज नहीं भरा, अब उन्हें बैंकों द्वारा जुर्माना लगाया जा रहा है। यही कारण है कि कुछ किसान आत्महत्या के रास्ते पर चल पड़े। हरसिमरत ने कहा कि पंजाब के किसानों के सिर पर 90 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है और कांग्रेस सरकार 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान कर रही है। इतनी राशि में तो कर्ज का ब्याज भी नहीं दिया जा सकता।