इंटरनेशनल फ्राड में तीन हैकर्स गिरफ्तार
विदेश में बैठे लोगों के डेबिट और क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन होटल, फ्लाइट आदि की बुकिंग के बदले कमीशन हासिल कर ठगी करने वाले हैकर्स गिरोह के तीन सदस्यों को यूटी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
पुलिस के साइबर सेल ने तीनों को मंगलवार को देर रात सेक्टर-35 के होटल से गिरफ्तार किया है। उनसे एक लैपटॉप और चार मोबाइल भी बरामद हुए हैं। जिस समय उन्हें गिरफ्तार किया गया, उस समय वह लोगों के कार्ड हैक कर ट्रांजेक्शन कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरोह के तार हवाला और देश विरोधी ताकतों को फंडिंग करने से तो जुड़े ही हैं, वहीं मनी लांड्रिंग के नजरिये से भी पुलिस जांच कर रही है। जरूरत पड़ी तो अन्य एजेंसियों से भी इसकी मदद ले सकते हैं।
पकड़े गए तीनों आरोपियों की पहचान नई दिल्ली के बदरपुर बार्डर निवासी अंकुर शर्मा (23), जीरकपुर निवासी राजेश शर्मा (43) और गाजियाबाद निवासी पवन सिंह (31) के तौर पर हुई है। पुलिस के अनुसार राजेश लाइजनिंग का काम करता था, जबकि अंकुर और पवन हैकर्स हैं।
सेक्टर-9 स्थित पुलिस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में डीआईजी आलोक कुमार, डीएसपी साइबर रश्मि यादव और इंस्पेक्टर हरेंद्र शेखों ने बताया कि इन हैकर्स के तार हवाला और देश विरोधी गतिविधियों से जुड़ रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये पैसे जमा कर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को फंडिंग करते हैं। ये एक एनजीओ के माध्यम से पैसा ट्रांसफर करते थे। इसका पता चलने पर सरकार ने उस एनजीओ को बंद करवा दिया था। उसकी भी जांच चल रही है।
इंटरनेशनल फ्राड में तीन हैकर्स गिरफ्तार
एक शहर में ज्यादा वक्त नहीं रहते थे
डीआईजी के अनुसार ये तीनों हैकर्स देशभर में अलग-अलग शहरों से वारदात को अंजाम देते थे। ये एक शहर में ज्यादा वक्त नहीं रहते थे। साथ ही यह प्रॉक्सी आईपी एड्रेस का इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी की पकड़ में न आ सकें। फिलहाल पुलिस ने तीनों को जिला अदालत में पेश कर वहां से 10 दिन का रिमांड हासिल किया है।
ऐसे करते थे ठगी :
इंस्पेक्टर शेखों के अनुसार अंकुर और पवन विदेशों में प्रचलित डार्क साइट्स (हैकर्स की साइट्स) के माध्यम से लोगों के डेबिट और क्रेडिट कार्ड का डाटा खरीदते थे। कहीं से पकड़े जाने की गुंजाइश न हो इसके लिए वह ऑनलाइन करेंसी बिटक्वाइन से पेमेंट करते थे। इसके बाद ये होटल्स, फ्लाइट बुकिंग कंपनियों, ऑनलाइन रिटेल आदि से संपर्क करते थे। इस काम को उनके गिरोह के अन्य सदस्य अंजाम देते थे। उन्हें बिजनेस देने के बदले वे कैश कमीशन की मांग करते थे। फिर होता था इनका खेल शुरू। ये क्रेडिट कार्ड के डाटा का इस्तेमाल कर ऑनलाइन पेमेंट करते थे। पेमेंट होने के बाद फौरन होटल या अन्य जगह से कैश में कमीशन लेते थे और वहां से गायब हो जाते। यही काम यह विदेशों में भी करते थे। विदेश का पैसा यहां ये हवाला के जरिये मंगाते थे।
पांच साल से काम कर रहे थे, एक दिन में 10 लाख तक की करते थे पेमेंट
इंस्पेक्टर शेखो के अनुसार शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये लोग पांच साल से ये काम कर रहे थे। अमूमन तौर पर ये एक दिन में 10 लाख रुपये का पेमेंट लोगों के कार्ड से करते थे। सिंगापुर निवासी एक पीड़ित से इस मामले में यूटी पुलिस से संपर्क किया है। पुलिस के अनुसार वह दो दिन बाद शहर उनसे खास इसी काम के लिए मिलने आ रहे हैं। उनके वहां होटल बताए जा रहे हैं, जिनसे इनकी बिजनेस देने के नाम पर डील हुई थी और आरोपियों ने उन्हें भी शिकार बना लिया था।