चंडीगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की तैयारी कर रहे उत्तर भारत के 23 हजार से अधिक युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है। सेक्टर- 32 के पीजी में हुए अग्निकांड के बाद यूटी प्रशासन के अवैध पेइंग गेस्ट हाउसों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से यह दिक्कत आ रही है।
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कार्रवाई से घबराए पीजी संचालक युवाओं से पीजी खाली करा रहे हैं जिससे वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। छात्राओं को इससे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। 22 फरवरी को सेक्टर- 32 स्थित एक पेईंग गेस्ट हाउस में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग में फंसकर तीन छात्राओं की मौत हो गई थी।
इस दर्दनाक हादसे के बाद यूटी प्रशासन ने शहर में चल रहे अवैध पेइंग गेस्ट हाउसों के खिलाफ अभियान चलाया है। प्रशासन के इस अभियान से पीजी संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। इससे घबराकर वह यहां रहने वाले छात्र छात्राओं को बाहर निकाल पीजी बंद कर रहे हैं।
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चंडीगढ़ शहर उत्तर भारत का एकमात्र शिक्षा का हब होने के कारण यहां 23 हजार से अधिक युवा अपना भविष्य संवारने के लिए रह रहे हैं। इनमें 10 हजार वह युवा हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। शहर के 10 कॉलेजों में 9000 ऐसे स्टूडेंट हैं जो पीजी में या फिर किराए के मकानों में रहकर ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त 4000 वह स्टूडेंट हैं जो पीयू कैंपस के बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
पढ़ रहे हैं इन राज्यों के स्टूडेंट
चंडीगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने के लिए पूरे उत्तर भारत से युवा यहां आते हैं। हिमाचल प्रदेश, लेह लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई शहरों से आकर युवा यहां रह रहे हैं।
इन प्रतियोगी परीक्षाओं पर फोकस
चंडीगढ़ में रहने वाले युवा मार्च से शुरू होने वाली कुछ प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर तैयारी में जुटे हुए हैं। इनमें एसबीआई, एसएससी और आईबीपीएस परीक्षाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं।
बोर्ड परीक्षाओं पर भी प्रतिकूल असर
शहर में पीजी बंद होने का असर 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों पर भी हुआ है। रहने के लिए छत नहीं मिल पाने के कारण वह पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। आपको बता दें कि 24 फरवरी से बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, जो 30 मार्च तक चलेंगी।
मैं जिस पीजी में रहती थी उसके संचालक ने प्रशासन की कार्रवाई से घबराकर पीजी को बंद कर दिया है। अभी दोस्त के यहां रहकर पढ़ाई कर रही हूं। यहां पढ़ाई नहीं हो पा रही है, जल्द ही अन्य विकल्प देखूंगी। - तनुप्रिया, छात्रा, सेक्टर- 22
प्रशासन के द्वारा अचानक पीजी को लेकर जो सख्ती की गई है वह अनुचित है। उन्हें मानकों को पूरा करने के लिए कुछ समय देना चाहिए, जिससे वहां रहने वाले छात्र छात्राओं को दिक्कत न हो। - मिताला, छात्रा, सेक्टर- 32
पीजी में रहने वाले छात्र छात्राओं को शिक्षण संस्थानों में ही रहने का विकल्प देना चाहिए। प्रशासन को इसके लिए प्रयास करने चाहिए। एबीवीपी छात्र हितों को देखते हुए प्रशासन से इसके लिए मांग करेगा। - कुदरत, पंजाब प्रभारी, एबीवीपी
समस्या सही है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा प्रशासन के लिए सर्वोपरि है। छात्र छात्राओं के रहने के लिए प्रशासन कई विक ल्पों पर विचार कर रहा है। जल्द ही इसका कोई हल निकाला जाएगा। - मनदीप सिंह बराड़, उपायुक्त, चंडीगढ़