बठिंडा शहरी सीट का प्रभाव ऐसा है कि जो उम्मीदवार यहां से जीतता है, सरकार बनने पर मंत्री बनता है। यहां के वोटरों ने हर बार हिंदू नेता पर ही ज्यादा भरोसा जताया है।
इसी के चलते कांग्रेस ने 1957 से लेकर 2012 तक सिर्फ दो बार किसी सिख नेता को बठिंडा शहरी से चुनाव मैदान में उतारा। इसमें एक बार उसे जीत नसीब हुई है।
इस साल तीसरी बार कांग्रेस ने गैर हिंदू नेता मनप्रीत बादल को मैदान में उतारा है। दूसरी तरफ अकाली दल ने सरूप चंद सिंगला और आम आदमी पार्टी ने दीपक बांसल पर दांव लगाया है।