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इन 11 मुद्दों पर फोकस होगा पंजाब का चुनाव, जानिए कौन मारेगा मैदान

Fri, 16 Dec 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब की सियासत
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पंजाब में विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। जहां एक और सर्द हवाओं ने दस्तक दी है, वहीं राज्य में सियासी फिजाएं में तैर रही हैं। पंजाब चुनावों में ये 11 मुद्दे अहम होंगे।
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1. नोटबंदी-
 प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी की घोषणा को एक माह से ज्यादा समय बीत गया है मगर बैंकों के आगे कतारें खत्म नहीं हुई है। इस फैसले ने पंजाब के हर वर्ग को प्रभावित किया। सबसे पहले वे चपेट में आए जिनके घरों में शादियां थीं। शादी के लिए उधार लेकर या बचा कर रख पैसा मिट्टी हो गया। कारोबारियों को भी तगड़ी चोट लगी। छोटे उद्यमियों को बड़ी तादाद में छंटनी करनी पड़ी। लुधियाना समेत कई औद्योगिक शहरों में हजारों लोग एकाएक बेरोजगार हो गए।

नोटबंदी का फैसला ऐसे समय लिया गया जब धान की अदायगी चल रही थी और गेहूं की बिजाई होनी थी। इसने किसानों को तबाह कर दिया। केंद्र सरकार द्वारा लगाई लिमिट के चलते धान के पैसे नहीं मिले, गेहूं की बिजाई लेट हुई। रही-सही कसर सहकारी बैंकों में नोट बदलने की सुविधा न देने से पूरी हो गई। आम नौकरीपेशा लोगों से लेकर स्टूडेंट्स भी बुरी तरह से नोटबंदी की चपेट में आए। जो अपने रोजमर्रा के कामकाज छोड़ कर बैंकों की लाइनों में लग रहे हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी लगातार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रही हैं। दूसरी ओर सत्तारूढ़ अकाली दल और भाजपा इसे कालेधन पर प्रहार बता रहे हैं।
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2. नदियों का पानी-
नदियों का पानी पंजाब की राजनीति में नेताओं का एक पुराना और कारगर हथियार माना जाता है। कांग्रेस और शिअद इसे लेकर एक-दूसरे पर हमला बोलती रही हैं। आम आदमी पार्टी के कन्वीनर से भी पहला सवाल यही किया जाता है कि वे सतलुज यमुना लिंक नहर पर अपना रुख स्पष्ट करें।  2004 में सतलुज यमुना लिंक नहर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाल था।

तभी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बतौर सीएम रातों-रात पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स एक्ट बना कर पंजाब का पानी हरियाणा को जाने से बचा लिया था। इसका नतीजा यह हुआ कि पाणियां दा राखा बन कर उभरे कैप्टन की अगुवाई में कांग्रेस ने 2007 के विधानसभा चुनाव में अकालियों का गढ़ माने जाते मालवा को फतेह कर लिया था। कांग्रेस ने 37 सीटें जीत कर शिअद को मालवा में 19 सीटों पर समेट दिया था। पंजाब का पानी अगर हरियाणा को जाता है तो सबसे बड़ा नुकसान मालवा का होगा। 68 सीटों वाला मालवा ही पंजाब में सरकारें बनाता रहा है।

इसलिए अब पानी का मुद्दा सभी पार्टियों के लिए अहम बन चुका है। पिछले महीने एसवआईएल पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एकाएक पंजाब की सियासत गर्मा गई। कैप्टन अमरिंदर ने लोक सभा और कांग्रेस के सभी 42 विधायकों ने विधानसभा से इस मुद्दे पर इस्तीफा दे दिया। उधर, अकाली दल ने आनन-फानन में एसवाईएल की जमीन डी-नोटीफाई करके किसानों को लौटा दी। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को कैश करने के लिए गांव कपूरी में पक्का मोर्चा लगाया, हालांकि वह फ्लॉप शो साबित हुआ। 

कानून व्यवस्था और नशे का मुद्दा भी अहम

सीएम बादल - फोटो : अमर उजाला
3. कानून-व्यवस्था-
पंजाब में लगातार गिरती कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष सरकार पर तीखे हमले कर रहा है। पिछले अरसे के दौरान कई बड़ी वारदात हुईं, जिनकी गुत्थी अब तक नहीं सुलझी है। नाभा की हाई सिक्योरिटी जेल को तोड़ कर आतंकी और गैंगस्टर भाग गए। हालांकि अगले ही दिन दिल्ली से आतंकी हरमिंदर सिंह मिंटू की गिरफ्तारी ने सरकार की मुश्किलें कुछ कम कर दीं। पर अब तक फरार गैंगस्टर का कोई पता नहीं चला है।

आरएसएस नेता ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा को दिनदहाड़े गोलियों से भून देने वालों का भी पुलिस अब तक कोई सुराग नहीं लगा सकी। नामधारी सांप्रदाय की माता चंद कौर के हत्यारे भी पुलिस के हाथों से दूर हैं। तो संत रणजीत सिंह ढडरियां वालों पर कातिलाना हमले के आरोपियों का भी कुछ पता नहीं चला है। लूट, मारपीट और हत्याओं की वारदातें लगातार हो रही हैं। बठिंडा के गांव में अकाली नेताओं ने एक हेड कांस्टेबल को पीटने के बाद उसकी नग्न परेड कराई। तरनतारन में भी एक पुलिसकर्मी की पत्नी और बेटे की हत्या कर दी गई।


4. खेती संकट-
कृषि प्रधान सूबे में खेती संकट भी एक अहम मुद्दा है। पिछले समय के दौरान हुई घटनाओं से किसान बेहद नाराज हैं। इस साल पहले गेहूं की फसल पर मौसम की मार पड़ी। उसके बाद कैश क्त्रस्ेडिट लिमिट रोके जाने के कारण अदायगी में बहुत दिक्कत आई। धान की फसल में यह समस्या और गंभीर हो गई। पहले तो केंद्र सरकार ने कैश लिमिट रोक दी। उसके बाद नोटबंदी का एलान कर दिया गया। जिसके चलते किसानों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी। कैश क्रेडिट लिमिट जारी होने के बाद भी धान की अदायगी नहीं हुई।

किसान न तो पुराने कर्ज समय पर लौटा सके, न नए कर्ज ले सके। उनको जुर्माना भी देना पड़ा। गेहूं की बिजाई लेट हो गई, जिसका असर सीधे तौर पर उत्पादन पर पड़ेगा। नोटबंदी के चलते इस समय फल व सब्जियों के दाम बेतहाशा गिर गए हैं। किसान मिल्क सोसाइटीज को दूध तो दे रहे हैं, पर उन्हें पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। राज्य सरकार ने पचास हजार रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज देने का एलान किया था, पर वह हवा में रह गया। 

5. नशे का मुद्दा-
पंजाब में नशे का मुद्दा हमेशा से अहम रहा है, हालांकि इस समय यह दूसरे मुद्दों के बीच दब गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह प्रमुख मुद्दा था। नशे के मुद्दे पर सरकार की दलील है कि पंजाब में कोई नशा पैदा नहीं होता। सारा नशा सीमा पार से आता है। पंजाब पुलिस उसे पकड़ कर देश के लिए जंग लड़ रही है। क्योंकि वही नशा देश के दूसरे हिस्सों में चला जाता। सरकार अपनी दलील के पक्ष में देश में सबसे ज्यादा रिकवरी और एनडीपीएस केसों के आंकड़े भी देती है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि सिर्फ आम नशेड़ियों को एनडीपीएस एक्ट में बंद किया जाता। बड़े मगरमच्छ पुलिस की पहुंच से दूर हैं। आप इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कैबिनेट मंत्री बिक्त्रस्म मजीठिया पर हमला कर रही है। इस साल रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म उड़ता पंजाब इसी मुद्दे पर आधारित थी। जिसकी रिलीज को लेकर भी पंजाब में काफी सियासत हुई। आखिर बाद में रिलीज की इजाजत मिल गई। 

धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी मामला भी सुर्खियों में

कैप्टन
6. धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी-
पंजाब में पिछले साल फरीदकोट में पावन धर्म ग्रंथ की बेअदबी का मामला सामने आया था। उसके बाद तो सूबे के तमाम हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आने लगीं। पूरे पंजाब के लोगों में रोष पैदा हो गया था। बहबल कलां में इसे लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले ने सियासी रंग ले लिया था। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और आप कन्वीनर अरविंद केजरीवाल ने मृतकों के घर जाकर शोक जताया था। उस समय सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर आ गई थी। उसके बाद मलेरकोटला में एक और पावन ग्रंथ की बेअदबी का मामला सामने आया। जिसमें पुलिस ने दिल्ली के आप विधायक नरेश यादव को नामजद किया था। यह मुद्दा भी लगातार सरकार के लिए मुश्किल बना है।

7. आर्थिक बदहाली-
सूबे में आर्थिक संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। पंजाब पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार अपने सियासी फायदे के लिए खजाने को पूरी तरह खाली कर रही है। मुलाजिमों और पेंशनरों के डीए, भत्ते और अन्य बकाया नहीं दिए जा रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद के लाभ भी पेंडिंग पड़े हैं। मुलाजिमों को अपने ही प्रॉविडेंट फंड से शादी या मकान बनाने के लिए पैसे निकालने की इजाजत नहीं दी जा रही है। जिससे मुलाजिम वर्ग नाराज है।

8. माफिया-
पंजाब में रेत-बजरी माफिया पहले एक अहम मुद्दा बना। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट माफिया को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगे। विपक्ष का आरोप है कि रेत-बजरी खनन पर पूरी तरह से सत्ताधारियों का कब्जा है। वहीं, ट्रांसपोर्ट पर भी बादल परिवार का कब्जा है। आए दिन बादल परिवार की बसों से होने वाले हादसों के चलते भी लोगों में काफी गुस्सा है। पिछले साल एक हदसे के बाद मामले ने काफी तूल पकड़ लिया था। यह मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा था। जिसके बाद डिप्टी सीएम ने डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू की थी। लेकिन हादसे अभी भी जारी हैं।

बेरोजगारी और दलित उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर दारोमदार

अरविंद केजरीवाल और सुखबीर बादल
9. विकास- 
तमाम मुद्दों के बीच शिअद-भाजपा गठबंधन विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगा। डिप्टी सीएम सुखबीर बादल और प्रदेश भाजपा प्रधान यह स्पष्ट कर चुके हैं। विकास के साथ-साथ केंद्र सरकार की अच्छी योजनाओं के साथ मतदाताओं तक पहुंचेंगे। सरकार के खाते में मोहाली का इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बठिंडा एयरपोर्ट है। आदमपुर एयरपोर्ट का भूमि पूजन भी चुनाव से पहले ही रख लिया गया है। अमृतसर में हैरिटेज वाक, गोबिंदगढ़ फोर्ट, हरिके में वाटर क्रूज समेत कई उपलब्धियां हैं। इनके साथ ही गठबंधन बुनियादी ढांचे के विकास को भी बड़ी उपलब्धि बता रहा है।

10. बेरोजगारी-
पंजाब में बेरोजगारी जैसा अहम मुद्दा दूसरे मुद्दों के बीच दब गया है। पर सभी पार्टियां बेरोजगारों की लंबी फौज को अपने पाले में करने में लगी हैं। आप ने सबसे पहले यूथ पर फोकस किया। लेकिन कांग्रेस ने उससे एक कदम आगे चलते हुए कॉफी विद कैप्टन जैसे आयोजनों से यूथ को जोड़ा। उसके बाद कांग्रेस ने कैप्टन स्मार्ट कनेक्ट स्कीम लॉन्च करके पचास लाख युवाओं को स्मार्ट फोन देने का एलान कर दिया। उसके बाद ही हर घर तों इक्क कैप्टन स्कीम लॉन्च करके एक परिवार से एक युवक को नौकरी देने का एलान किया है। कांग्रेस ने पुलिस भरती के नाम पर नौजवानों से ली गई फीस वापस करने को मुहिम चलाने का भी एलान किया था। आप ने यूथ मेनिफेस्टो में युवाओं से कई वादे किए हैं। सभी पार्टियां यूथ वोट बैंक को अपनी तरफ करने में लगी हैं।

11. दलित उत्पीड़न-
देश में सबसे ज्यादा 32 फीसदी दलित आबादी वाले पंजाब में दलित उत्पीड़न भी अहम मुद्दा है। पिछले साल अबोहर में शराब माफिया द्वारा दलित युवक भीम टांक की निर्मम हत्या के बाद यह मुद्दा खासा मुखर हुआ था। इस पर विपक्ष ने सरकार को बुरी तरह घेरा था। उसके बाद दलितों पर अत्याचार की कई घटनाएं सामने आई हैं। दलित वोट बैंक को लुभाने के लिए सभी पार्टियां अपना जोर लगा रही हैं। अरविंद केजरीवाल ने पहले कांशीराम के परिजनों से मुलाकात की।

उन्हें भारत रत्न दिए जाने की मांग उठाई। उसके बाद वह जालंधर के पास डेर बल्लां भी गए। हाल ही में केजरीवाल ने दलित को डिप्टी सीएम बनाने का एलान भी किया है। पार्टी पहले ही दलित मेनिफेस्टो जारी कर चुकी है। कांग्रेस और शिअद भी दलित नेताओं को प्रमोट कर रहे हैं। कांग्रेस ने शमशेर सिंह दूलो को राज्यसभा भेजा, चरनजीत सिंह चन्नी को सीएलपी लीडर बनाया। भाजपा ने विजय सांपला को पहले केंद्रीय राज्यमंत्री, बाद में प्रदेश भाजपा प्रधान बनाया।
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क्या कहते हैं राजनीतिक दल

Sukhbir Singh Badal - फोटो : Amar Ujala
शिअद- पंजाब व पंजाबियों के अधिकारों का असली पहरेदार शिअद ही है। गठजोड़ सरकार का दस वर्ष का कार्यकाल अपना प्रत्येक वायदा पूरा करने की गवाही भरता है। गठबंधन सरकार ने अपने वायदे पूरे किये हैं। अगले चुनाव में गठबंधन को डाली जाने वाली प्रत्येक वोट राज्य में स्थिरता , विकास , अमन-शांति विकास व कुशल शासन के लिए होगी। एसवाईएल पर शिअद का स्टैंड क्लीयर है और पंजाब का पानी प्रदेश से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। किसानों को ट्यूबवैलों के लिए मुफ्त बिजली शिअद ही दे सकती है। ?शिअद ही पंजाब के कमजोर वर्गों को आटा दाल योजना के अलावा कैंसर व हैपेटाइटिस-सी जैसी घातक बीमारियों के लिए मुफ्त ईलाज उपलब्ध करा सकती है।

कांग्रेस- नोटबंदी से हुई मौतों के मामले में पार्टी अदालत जाएगी। 86 प्रतिशत रुपया बाजार से निकल गया है। पंजाब सहित देश भर में अर्थव्यवस्था ढह रही है। नकदी की भारी तंगी के चलते कतारों में खड़े करीब सौ लोग अपनी जिंदगियां खो चुके हैं। हजारों इस पीड़ा को झेल रहे हैं। इस कदम ने ठेके पर नियुक्त कर्मचारियों और औद्योगिक वर्करों को बेरोजगार बना दिया है। पार्टी इस मुद्दे पर अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। आप कन्वीनर अरविंद केजरीवाल की एसवाईएल पर बहुत देरी से आई प्रतिक्रिया उनकी पार्टी में भारी विद्रोह और भ्रष्टाचार से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है। बड़े स्तर पर नेताओं व वॉलंटियर्स द्वारा पार्टी छोड़ने के बाद केजरीवाल की पार्टी पूरी तरह अव्यवस्था से घिर चुकी है। 
आप- पंजाब की जवानी को नशों से बचाने के बजाय कैप्टन ने मजीठिया को सीबीआई जांच से मुक्त करवाया। कैप्टन ने उस समय अपनी पार्टी और तत्कालीन सूबा प्रधान के उलट जाकर मजीठिया के खिलाफ सीबीआई जांच रुकवाने को सोनिया गांधी से मिले। उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने नशा तस्करी के सबूत होने के बावजूद मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की। वहीं, एक माह पहले अकालियों के कैप्टन के खिलाफ सभी भ्रष्टाचार केस बंद कर दिए।
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