चंडीगढ़। खेलों में भाई-भतीजावाद नहीं होगा। खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के बूते खुद अपनी तकदीर लिखेंगे। यह बात मंगलवार को चंडीगढ़ में खेलो इंडिया की कीर्ति योजना का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि भारत ने जिस तरह जी-20 का सफल आयोजन किया, उसे दुनिया ने देखा। भविष्य में ओलंपिक खेलों का भी ऐसा आयोजन करेंगे कि दुनिया याद रखेगी। सेक्टर-7 के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में अनुराग ठाकुर ने कहा कि जब हर क्षेत्र में देश आगे बढ़ रहा है तो खेल में क्यों नहीं। देश वर्ष 2030 यूथ ओलंपिक और वर्ष 2036 के समर ओलंपिक के आयोजन की राह पर आगे बढ़ रहा है। भारतीय खिलाड़ी हर खेल में अपना दम दिखा रहे हैं। पिछले एशियाई खेलों में भारत को 64 पदक मिले थे, इस बार खिलाड़ियों ने पदकों का शतक लगाते हुए 107 मेडल देश की झोली में डाले। यह हर भारतीय के लिए खुशी की खबर है। पैरा ओलंपिक में भी खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर 111 पदक जीतकर दिखा दिया कि वह भी किसी से कम नहीं।
केंद्रीय खेल मंत्री ने देशभर में लागू की जाने वाली योजनाओं का भी खुलासा किया। कीर्ति योजना के बारे में बताते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि इसके जरिए हम एक खिलाड़ी के हुनर को पहचान कर उसे भविष्य के लिए तराशेंगे। उन्होंने छोटे बच्चों को हर खेल इवेंट में हाथ आजमाने की सलाह दी। कहा कि छोटी उम्र में अगर खेलों से जुड़ाव हो जाए तो जीवन भर व्यक्ति स्वस्थ और फिट रहेगा। युवाओं को नशे से दूर रखने में भी खेलों को महत्वपूर्ण योगदान है।
उन्होंने कहा कि पहले कहावत थी- पढ़ोगे, लिखोगे तो बनोगे नवाब, लेकिन अब कहावत है- पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे लाजवाब। उन्होंने कहा कि वह खुद भी खिलाड़ी रहे हैं और पंजाब टीम की कप्तानी की है। पिता को भी लगा मैंने कुछ किया। खेल मंत्री ने कहा कि कीर्ति योजना में हम पहले फुटबॉल, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग सहित 10 खेल इवेंट को चुन रहे हैं।
खेल मंत्री ने कहा कि यूपीए की पिछली सरकार में पिछले 10 साल में खेल का 618 करोड़ का बजट था, लेकिन जब केंद्र में मोदी सरकार आई तो तीन हजार करोड़ का बजट खर्च कर इंफ्रास्ट्रक्चर भी खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा अगले डेढ़ साल में खेलो इंडिया के 1,075 सेंटर पूरे भारतवर्ष में खोले जाएंगे। मौके पर शहर की सांसद किरण खेर भी मौजूद रहीं।
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खिलाड़ी करेंगे पंजीकरण, हम परखेंगे प्रतिभा
केंद्रीय खेल मंत्री ने कहा कि कीर्ति योजना के तहत माई भारत एप पर जाकर 9-18 वर्ष तक के खिलाड़ी खुद को पंजीकृत कर सकते हैं। इसमें अपना नाम, खेल का नाम, शहर का नाम भरना होगा। इसके बाद कीर्ति योजना की टीम खिलाड़ी के शहर पहुंचेगी और ट्रायल लेकर खिलाड़ी को परखेगी। चुने जाने पर खिलाड़ी को साईं ट्रेनिंग सेंटर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कई सुविधाओं के साथ ट्रेनिंग दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा जब हमने इस योजना को लांच करने के बारे में सोचा कि किस शहर से इसे लांच किया जाएगा। तब हमारे देश के सबसे सुंदर शहर चंडीगढ़ को चुना और आज इसे इसी शहर से लांच कर दिया। उन्होंने कहा चयन प्रक्रिया बिल्कुल पारदर्शिता रहेगी। इसमें कोई भाई भतीजावाद नहीं होगा।
पदक विजेताओं को इनाम की राशि लेने के लिए नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर
खेल मंत्री ने कहा कि हमने तकनीक का प्रयोग इस तरह से किया है कि अब पदक विजेता खिलाड़ियों को पैसे लेने के लिए साईं और मिनिस्ट्री ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब खिलाड़ी ऑनलाइन ही अपने सर्टिफिकेट के साथ आवेदन कर सकते हैं। हाल ही में एशियाई खेलों के खिलाड़ियों को पैसा उनके खातों में सीधे गया।
पहले दिन 200 बच्चों के ट्रायल
खेल विभाग के संयुक्त खेल निदेशक सुनील रेयात ने बताया कि मंगलवार को शहर में कीर्ति योजना के तहत 200 बच्चों के ट्रायल लिए गए। अगले छह दिनों तक माई भारत पोर्टल पर पंजीकरण करवाने वाले खिलाड़ियों के ट्रायल होंगे। योजना के तहत प्रत्येक खेल के 200 खिलाड़ी रोजाना ट्रायल देंगे। यूटी खेल विभाग के कोच खिलाड़ियों की खेल तकनीक और फिजिकल एजुकेशन के अध्यापक उनकी फिटनेस को परखेंगे। चयनित खिलाड़ी खेल परिसर-7 में एथलेटिक्स, वॉलीबाल और बैडमिंटन की कोचिंग लेंगे। खेल परिसर-42 में खो-खो, कबड्डी, हाकी, और फुटबाल की कोचिंग दी जाएगी।