चंडीगढ़। शहर में नाबालिग बच्चे गायब हो रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करेें तो पिछलेे पांच सालों में चंडीगढ़ से करीब 728 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 669 तो वापस परिजनों से मिल गए, लेकिन 59 लापता बच्चों का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया हैै। पुलिस सहित अन्य जांच टीमों के भी हाथ खड़े हो चुके हैं, बावजूद इसके परिजन उम्मीद लगाए बैठे हैं कि किसी दिन उनकी आंखों के तारे वापस आ जाएं। वहीं, बीते सप्ताह में हरियाणा स्टेट क्राइम टीम के एएसआई राजेश कुमार ने सेक्टर-39 सीसीआई व सेक्टर-15 आशियाना में पहुंचे 8 लावारिस लड़के-लड़कियों को उनके परिजनों से मिलवाया है।
हरियाणा स्टेट क्राइम सेल व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के एएसआई राजेश को 6 सितंबर को सूचना मिली थी कि इन दोनों जगहों पर कुछ लावारिस बच्चे हैं। एएसआई राजेश आशियाना में पहुंचे जहां आठ साल की बच्ची मिली। यह बच्ची 24 दिसंबर 2023 को रेलवे स्टेशन चंडीगढ़ से लावारिस मिली थी। इस युवती को कुछ लोग यूपी के एटा से उठाकर लाए थे और उससे भीख मंगवाते थे। वह उनके चंगुल से छूटकर यहां पहुंची जिसे गांव के अलावा कुछ नाम याद नहीं था। जांच शुरू की तो यूपी में रामपुर समुद्र जिला जौनपुर यूपी से संपर्क करने पर उसके परिजनों का बनारस का पता मिला। इसके बाद परिजन चंडीगढ़ पहुंचे और उसकी मां बच्ची को गले लिपटकर रोने लगी। इसी तरह आठ साल का बच्चा सेक्टर-31 में लावारिस घूमता मिला था। उसने काउंसलिंग में अपना, पापा और बुआ का नाम बताया था। मोगीनंद बताने के आधार पर बच्चे की बुआ को तलाश किया जिसने बताया कि वह उसके भाई का लड़का निवासी भोगपुर थाना रायपुररानी जिला पंचकूला है। बाकायदा इस बच्चे के पिता को सीआईए स्टाफ पूछताछ के लिए लेकर गया था और उसकी पिटाई करते हुए पूछा था कि कहीं उसने अपने बच्चे का मर्डर तो नहीं कर दिया। यह मामला जीरकपुर थाने में दर्ज था। इसी तरह से दो बच्चे चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर आठ अगस्त को लावारिस मिले थे। इनके अपहरण का मामला लुधियाना में दर्ज मिला। परिजनों का पता निकाला और वीडियो कॉल के जरिए उनकी पहचान करवाई गई। इसी तरह से 9 साल का बच्चा सेक्टर-52 पेट्रोल पंप पर लावारिस मिला जिसे सिर्फ अपने गांव का नाम पंडितपुर के अलावा कुुछ नहीं पता था। जब पंडितपुर को सर्च किया गया तो यह गांव बिहार के मोतीहारी जिले में मिला। इस बच्चे के परिजन मोहाली में रहते हैं और उनसे संपर्क करने पर पता चल कि 13 अप्रैल 2024 से सेक्टर-89 से बच्चा गुमशुदा था। इसकी एफआईआर पुलिस स्टेशन सुहाना जिला मोहाली दर्ज मिली। वहीं, 8 साल के बच्चे को तो चंडीगढ़ पुलिस ने लावारिस बता उसे एडॉप्शन पर देने की कार्रवाई शुरू कर दी थी, लेकिन एक सप्ताह में ही उसके भी परिजनों को ढूंढ़कर उनसे मिलवाया गया।
क्या कहता है चंडीगढ़ पुलिस कर रिकॉर्ड
अगर चंडीगढ़ पुलिस के रिकाॅर्ड पर ही नजर डाली जाए तो वर्ष 2019 में पुलिस के पास कुल 140 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज हुए। हालांकि पुलिस सहित अन्य जांंच टीमों ने इनमें से 134 बच्चों को ढूंढ लिया और छह का कोई पता नहीं चल सका। वर्ष 2020 में कुल 125 बच्चे लापता हुए। इनमें से 119 को ढूंढ लिया और छह बच्चे अभी भी लापता हैं। इसी तरह से वर्ष 2021 में लापता बच्चों की संख्या बढ़कर 159 हो गई और पुलिस उनमें से 156 का पता लगाने में सफल रही और तीन का पता नहीं चल सका। वर्ष 2022 में पुलिस को 155 लापता बच्चों की सूचना मिली जिनमें से 138 को ढूंढ़कर परिजनों से मिलवाया गया और 17 बच्चे अभी भी लापता हैं। वर्ष 2023 में 149 नाबालिग बच्चे गायब हुए, जिनमें से पुलिस केवल 122 को ही ढूंढ पाई थी और 27 बच्चे अभी भी गुमशुदा हैं जबकि वर्ष 2024 में भी अभी तक 60 से अधिक बच्चे लापता हुए और इनमें से कई का कोई सुराग नहीं लग पाया है। पुलिस वर्तमान में लापता और अपहृत बच्चों के कुल 59 मामलों की जांच कर रही है। इनमें से 30 बच्चे अभी भी लापता हैं और 29 मामले विभिन्न पुलिस स्टेशनों द्वारा संभाले जा रहे हैं।
ऑपरेशन मुस्कान चलाकर की जाती बच्चों की तलाश
चंडीगढ़ पुलिस सहित एएचटीयू द्वारा साल में एक सेे दो बार ऑपरेशन मुस्कान चलाया जाता है। इस ऑपरेशन के दौरान करीब 15 टीमों का गठन कर चंडीगढ़ से लापता बच्चों का पता लगाने के लिए हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली, यूपी और अन्य पड़ोसी राज्यों सहित विभिन्न राज्यों में बच्चों के आश्रय गृहों का दौरा किया जाता है। इसके अलावा पुलिस की एएचटीयू विभिन्न स्थानों जैसे बाजार, स्कूल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और कॉलोनियों में जागरूकता शिविर आयोजित करती है, ताकि लोगों को मानव तस्करी और बच्चों से संबंधित मुद्दों के बारे में शिक्षित किया जा सके।