रोहतक, महेंद्रगढ़, जींद, पानीपत, कैथल और झज्जर में दवाओं का टोटा
पेट दर्द, हड्डी रोग और आंखों की दवा तक स्टॉक में नहीं
चार जिलों में दवा खरीद की करोड़ों रुपये की राशि अटकी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़/रोहतक/करनाल/हिसार।
हरियाणा के छह जिला अस्पतालों में एक बार फिर दवाओं की किल्लत हो गई है। कई जिला अस्पतालों में तो कैल्शियम से लेकर खांसी की दवा तक नहीं है। कुछ जिलों में डायबिटीज, त्वचा व स्त्री रोग संबंधी, पेट दर्द, हड्डी दर्द और आंखों में जलन की दवाएं भी काफी दिनों से खत्म हैं। मरीजों को मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दाम पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। वहीं, चार जिलों में दवाएं तो उपलब्ध हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर खरीदी गई दवाओं की करोड़ों रुपये की राशि मुख्यालय पर अटकी हुई है। इससे भी दवाएं खरीदने में जिलों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हरियाणा सरकार मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में दवाएं मुफ्त मुहैया कराती है। रोहतक, महेंद्रगढ़, पानीपत, कैथल, जींद और झज्जर में दवाओं का टोटा है। रोहतक जिला अस्पताल में कैल्शियम, खाली पेट लेने वाले कैप्सूल, डायबिटीज, त्वचा व स्त्री रोग संबंधी जरूरी दवाएं नहीं हैं। महेंद्रगढ़ के नागरिक अस्पताल में 10 दिन पहले 327 प्रकार की दवाइयां भिवानी स्थित वेयर हाउस से पहुंची थीं। अस्पताल में कफ सिरप, गैस से संबंधित परेशानियों में दी जाने वाली बी कॉम्प्लेक्स, ओमप्राजोल, पैनटॉप, खांसी से संबंधित परेशानियों में दी जाने वाली दवाएं नहीं हैं। जींद के नागरिक अस्पताल में खांसी की दवा व कैल्शियम की गोलियां खत्म हो गई हैं। झज्जर के सरकारी अस्पताल में कई दिनों से दवा की कमी चल रही है। अस्पताल में खांसी, पेट दर्द, हड्डी दर्द और आंखों में जलन की दवा काफी दिनों से खत्म है। चर्म रोग की दवा भी उपलब्ध नहीं है। पानीपत जिला अस्पताल में 250 जरूरी दवाओं में से 130 उपलब्ध नहीं हैं। अस्पताल में उल्टी संक्रमण जैसी दवाएं भी नहीं हैं। हर महीने 15 से 20 लाख रुपये की दवाएं खरीदी जाती है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पर दवा कंपनियों के 20 लाख रुपये बकाया हैं। कैथल अस्पताल में लंबे समय से आंखों में जलन और ओमप्राजोल की दवा खत्म है। दो दवा एजेंसियों के करीब डेढ़ करोड़ रुपये बकाया चल रहे हैं।
आठ जिलों में नहीं है दवाओं की कमी
सोनीपत के नागरिक अस्पताल व गोहाना में सभी दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। रेवाड़ी, चरखी दादरी, भिवानी, सिरसा, हिसार और कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में भी सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। फतेहाबाद जिले में अप्रैल तक दवाओं का संकट रहा था। भुगतान नहीं होने पर कंपनियों ने दवाएं देने से मना कर दिया था। विभाग के एक करोड़ रुपये जारी करने के बाद भुगतान किया जा चुका है। पिछले तीन माह यानी अप्रैल से जून तक 55 लाख रुपये की दवाइयां खरीदी जा चुकी हैं। अब विभाग की तरफ से जिले को एक करोड़ रुपये की मंजूरी और मिली है।
निजी कंपनियों का करोड़ों बकाया
यमुनानगर में स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं, जो दवाएं अस्पताल से नहीं मिल पातीं उनके लिए मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोला गया है। जिले में करीब दो करोड़ रुपये दवा कंपनियों का स्वास्थ्य विभाग पर बकाया है। करनाल जिला नागरिक अस्पताल में सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं। पिछले साल करीब ढाई करोड़ रुपये दवा कंपनियों का बकाया था, वह जून 2024 तक सिर्फ 65 लाख रुपये शेष है। अंबाला सिटी नागरिक अस्पताल में भी सभी प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। जून तक अस्पताल को दवाओं के लिए 50 लाख रुपये का भुगतान करना था, जिसमें से 45 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है। प्रत्येक माह अस्पताल में 10 से 12 लाख रुपये की दवाएं खरीदी जाती हैं।
अधिकतर जिलों के सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं हैं। इसको लेकर समीक्षा बैठक भी की गई है और जरूरी दवाइयां खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ को स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीदने के लिए वित्तीय शक्तियां दी गई हैं। जहां कहीं भी कमी होगी उसे जल्द पूरा कराया जाएगा और अधिकारियों से इस संबंध में जवाब भी तलब किया जाएगा।
-सुधीर राजपाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग