-दिव्यागों और एससी अधिकारियों की पदोन्नति के मामले लंबित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में पिछले डेढ़ माह से अधिक समय से परिवहन विभाग में निदेशक का पद खाली है। स्थायी नियुक्ति नहीं होने के चलते निदेशालय में फाइलों के अंबार लग गई है। काफी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े मामलों की फाइलें भी लंबित हैं। उधर, आम जनता के लिए काफी महत्वपूर्ण विभाग होते हुए भी पद को इतने लंबे समय तक खाली रखने को लेकर रोडवेज यूनियन जताने लगी हैं। यूनियन ने मांग की है कि कर्मचारियों की समस्याओं को देखते हुए तुरंत प्रभाव से निदेशक की नियुक्ति की जाए। आईएएस अजय तोमर को सितंबर माह में निदेशक पद से बदला गया था, इसके बाद से यह पद खाली चल रहा है। लिंक अधिकारी के तौर पर आईएएस अशोक मीणा के पास अतिरिक्त चार्ज है। लेकिन पहले से ही मीणा के पास आबकारी एवं कराधान विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में परिवहन विभाग भी काफी बड़ा और अहम है। इसलिए दोनों विभागों की फाइलों को निपटाना आसान नहीं है। एक एक करके फाइलों का अंबार हो रहा है। वहीं, दिव्यांग और अनुसूचित जाति के कर्मचारियों और अधिकारियों को पदोन्नति के मामले भी अटक गए हैं, जबकि सरकार इसके लिए पहले ही आदेश जारी कर चुकी है।
पद को तुरंत भरा जाय : रोडवेज यूनियन
रोडवेज यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि निदेशक पद काफी अहम होता है और कर्मचारियों से जुड़ी तमाम फाइलें यहीं से होकर गुजरती है। इसके अलावा, फील्ड के अधिकारियों से भी निदेशालय का सीधा दखल होता है, लेकिन डे़ढ़ माह बाद भी पद खाली है। इससे रोडवेज विभाग की कार्यप्रणाली पर असर पड़ रहा है, इसे तुरंत प्रभाव से भरा जाए। इस बारे में परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा का कहना है कि इस संबंध में सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की जाएगी।
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कहीं फील्ड में गए अधिकारी के लिए खाली तो नहीं पद
विभाग में चर्चा है कि इतना लंबा समय होने पर भी स्थायी निदेशक की तैनाती नहीं होना सवाल खड़े करता है। विभागीय कर्मचारियों को आशंका है कि कहीं ये पद फील्ड में गए एक आईएएस के लिए तो खाली नहीं है। क्योंकि वह आईएएस पहले भी निदेशक पद पर सेवाएं दे चुके हैं और अब फील्ड की बजाए वापस मुख्यालय स्तर आना चाहते हैं। आगामी कुछ दिनों में हरियाणा में बड़े स्तर पर आईएएस व एचसीएस अधिकारियों के तबादले होने हैं, इसलिए चर्चा है कि कहीं दोबारा से पुराने निदेशक ही विभाग में तो नहीं आ रहे।