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Chandigarh News: कैसे होगा चुनाव, पांच निगम व एक पालिका की वार्डबंदी का काम अधूरा

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वार्डबंदी का काम पूरा होने में लगेंगे दो माह, विधानसभा चुनाव के बाद ही निकायों के चुनाव संभवअमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। हरियाणा की 35 निकाय संस्थाओं के चुनाव लंबित हैं। इनमें 29 निकाय संस्थाओं की वार्डबंदी का काम पूरा हो चुका है, जबकि छह निकाय संस्थाओं की वार्डबंदी का काम अधूरा है। इनमें हिसार, रोहतक, करनाल, यमुनानगर, पानीपत नगर निगम और पुंडरी नगर पालिका का काम अधूरा पड़ा है।

इन निकायों में वार्डबंदी का काम पूरा होने में दो महीने का समय और लग सकता है। इस हिसाब से अक्तूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शहरी निकायों में चुनाव होना संभव नहीं है। हालांकि जिन निकायों की वार्डबंदी पूरी हो चुकी है, यदि सरकार वहां चाहे तो चुनाव करवा सकती है।
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प्रदेश की 35 निकाय संस्थाओं में से 28 निकाय संस्थाएं ऐसी हैं, जिनका कार्यकाल 2022-23 और सात निकाय संस्थाओं का कार्यकाल जनवरी 2024 में पूरा हो चुका है। कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकार ने इन निकायों की वार्डबंदी का काम शुरू करवा दिया था लेकिन आपत्ति व कोर्ट में वार्डबंदी को चुनौती देने के मामलों की वजह से निकायों के वार्डबंदी के काम प्रभावित होते रहे। हालांकि इसी साल पूर्व सीएम मनोहर लाल ने शहरी निकाय विभाग को इन कामों को जल्द निपटाने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बाद 29 निकाय संस्थाओं की तो वार्डबंदी हो गई, मगर हिसार, रोहतक, करनाल, यमुनानगर, पानीपत नगर निगम और पुंडरी नगर पालिका की वार्डबंदी का काम अभी पूरा नहीं हो सका है। निकाय विभाग के मुताबिक छह निकायों में वार्डबंदी का काम अंतिम चरण पर है। इसमें डेढ़ से दो महीने का समय लग सकता है।
पत्र लिखे, नहीं आया जवाब
राज्य चुनाव आयोग व निकाय विभाग की ओर से चुनाव कराने के लिए पत्र लिखे गए हैं, मगर अभी तक सरकार की ओर से चुनाव कराने के लिए जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन निकायों की वार्डबंदी हो चुकी है, वहां चुनाव करवाने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उधर, राज्य चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी हरियाणा विधानसभा वार मतदाताओं की सूची मांगी है। चुनाव आयोग इन मतदाता सूचियों को संशोधित करेगा, जिसमें भी करीब डेढ़ से दो महीने का समय लग सकता है।

इन निकायों में नहीं हैं चुने गए प्रतिनिधि: राज्य की 35 निकाय संस्थाओं में अब चुने गए प्रतिनिधि नहीं है। सारा काम अधिकारियों के जिम्मे है। सरकार ने अधिकारियों को शक्तियां दे रखी हैं। निकायों में चुने गए प्रतिनिधि नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इन निकायों के चुनाव लंबित पड़े हैं

कुरुक्षेत्र के पिहोवा, लाडवा, शाहाबाद व इस्माइलाबाद नगर पालिका का चुनाव लंबित है। थानेसर नगर परिषद का चुनाव 2021 से नहीं हुआ है। जबकि तीन बार वार्डबंदी हो चुकी है। मामला हाईकोर्ट में है। अंबाला छावनी नगर परिषद सदर व नारायणगढ़ व बराड़ा नगरपालिका का चुनाव लंबित है, इनकी भी वार्डबंदी हो चुकी है। पानीपत और हिसार निगम की वार्डबंदी अधूरी है। वार्डबंदी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरक्षण तय किया जाना है। उधर, सिरसा व कालांवाली में डेढ़ साल से बिना चेयरमैन व प्रधान के कामकाज चल रहा है। रोहतक निगम का कार्यकाल 9 जनवरी को खत्म हो चुका है। नए सिरे से निगम की वार्डबंदी की गई। इसमें परिवार पहचान पत्र को आधार मानकर 22 वार्ड ही रखे गए। सभी वार्डों की सीमाओं में परिवर्तन किया गया है, जिसको लेकर 22 आपत्तियां आई थीं। स्थानीय स्तर पर वार्डबंदी का काम पूरा हो चुका है। आपत्तियों की सुनवाई कर नए सिरे से ड्राफ्ट मार्च में चंडीगढ़ मुख्यालय भेजा गया था, लेकिन अभी आधिकारिक तौर पर मुख्यालय से नई वार्डबंदी घोषित नहीं की गई है।
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-पांच नगर निगम सहित नगर परिषद और नगरपालिकाओं में चुनाव लंबित हैं। निकायों में वार्डबंदी का कार्य लंबित होने के चलते अभी चुनाव और लटक सकते हैं। वार्डबंदी का काम चल रहा है। संभावना है कि विधानसभा चुनावों से पहले या फिर उसके बाद निकायों के चुनाव होंगे।
-सुभाष सुधा, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री।
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