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Chandigarh News: चंडीगढ़ में बिजली विभाग के निजीकरण का रास्ता साफ

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चंडीगढ़। बिजली विभाग के निजीकरण करने के फैसले को चुनौती देने वाली यूटी पावरमैन यूनियन की याचिका को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में बिजली विभाग के निजीकरण का रास्ता साफ कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नीतिगत निर्णय में न्यायालय के दखल की संभावना बहुत कम होती है और इस मामले में हम इसमें दखल नहीं देना चाहते। यूटी पावरमैन यूनियन चंडीगढ़ के महासचिव गोपाल दत्त शर्मा ने याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि चंडीगढ़ में बिजली उसके पड़ोसी राज्यों की तुलना काफी सस्ती है। बावजूद इसके चंडीगढ़ का बिजली विभाग लगातार मुनाफे में है। मुनाफे के बावजूद शहर के बिजली विभाग का निजीकरण किया जा रहा है। हाईकोर्ट को बताया गया कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 17 अप्रैल, 2020 को एक पत्र जारी कर बिजली विभाग के निजीकरण के लिए प्रस्ताव मांगे थे। 5 जून 2020 को याचिकाकर्ता ने अपने सुझाव देते हुए कहा था कि शहर का बिजली विभाग बेहतर काम कर रहा है। इसके बाद 10 जून को केंद्र सरकार ने देश के सभी केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली विभाग के निजीकरण के लिए एक ऊर्जा सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया था। याचिकाकर्ता यूनियन ने 6 जुलाई को प्रधान मंत्री को रिप्रजेंटेशन देते हुए इसका विरोध किया। इसके बाद 17 जुलाई को ऊर्जा सचिव को मांगपत्र दिया गया था। इसके बाद जुलाई और फिर 2 सितंबर को फिर रिप्रजेंटेटिव देते हुए शहर के बिजली विभाग के निजीकरण के निर्णय और इसके लिए जारी किए जाने के वाले टेंडर को वापस लेने की मांग की गई। इन सबके बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन ने 10 नवंबर को एक पब्लिक नोटिस जारी कर शहर के बिजली विभाग को निजी हाथों में देने के लिए निजी कंपनियों से बोली मंगवा ली। याचिकाकर्ता यूनियन ने इस निर्णय को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने टेंडर पर रोक लगा दी थी, लेकिन यूटी प्रशासन की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक का आदेश रद्द कर दिया था।
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