चंडीगढ़। शहर की व्यावसायिक और इंडस्ट्रियल लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड करने को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रशासन की तरफ से पिछली सुनवाई के दिशा निर्देशानुसार एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें प्रशासन ने फ्री होल्ड होने के दो फायदे और पांच नुकसान गिनाए। शीर्ष अदालत ने सभी को ठीक नहीं माना और तीन हफ्ते में उचित फैसला लेने के आदेश दिए। ऐसा नहीं होने पर केंद्रीय गृह सचिव एके भल्ला को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए।
सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय और प्रशासन के अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई थी। इसमें मंत्रालय ने फ्री होल्ड के फायदे-नुकसान, कन्वर्जन रेट, नियम व शर्तें, मॉडल व कितनी संपत्ति फ्री होल्ड करनी होगी, इसकी जानकारी मांगी थी। प्रशासन ने वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक बुलाई और प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित की मंजूरी के बाद जवाब बनाकर भेज दिया। जवाब में प्रशासन ने फ्री होल्ड के फायदे तो सिर्फ दो गिनाए लेकिन नुकसान पांच गिना दिए हैं। फायदों में प्रशासन की तरफ से कहा गया कि फ्री होल्ड होने से टाइटल क्लियर होंगे तो उद्योगपति लोन उठा सकेंगे। जरूरत के अनुसार नए बिजनेस शुरू होंगे। इंडस्ट्री आगे बढ़ेगी। अपने जवाब में प्रशासन ने दो जनवरी 2015 में तत्कालीन प्रशासक द्वारा फ्री होल्ड नहीं किए जाने के नोट का भी जिक्र किया है। इस रिपोर्ट को कंपाइल कर कोर्ट में पेश किया गया। इस पर शीर्ष अदालत ने एक-एक कर जवाब दिया और प्रशासन की सभी चिंताओं को जायज नहीं माना है।
प्रशासन की ओर से गिनाए गए नुकसान
1. चंडीगढ़ लैंडलॉक सिटी है। फ्री होल्ड करने पर प्रशासन के संपत्ति कम हो जाएगी
2. और 3. ग्राउंड रेंट रेगुलर आमदनी नहीं होती। फ्री होल्ड संपत्ति से निवेश बढ़ेगा। रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रशासन को टैक्स मिलेगा और राजस्व बढ़ेगा।
4. फ्री होल्ड होते ही कई संपत्तियां बिक जाएंगी
5. कई संपत्तियां पहले ही बिक चुकी हैं, फ्री होल्ड होने के बाद कोर्ट केस बढ़ेंगे
सुप्रीम कोर्ट का जवाब
1. ये लॉजिक समझ से परे है। संपत्ति लीज होल्ड हो या फ्री होल्ड प्रशासन अपनी मर्जी के अनुसार तो इस्तेमाल कर नहीं सकता।
2 और 3. ग्राउंड रेंट रेगुलर आमदनी नहीं होती। फ्री होल्ड संपत्ति से निवेश बढ़ेगा। रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रशासन को टैक्स मिलेगा और राजस्व बढ़ेगा।
4. फ्री होल्ड होने से ईज ऑफ डूइंग बढ़ेगा। निवेश करने के लिए उद्योगपति आकर्षित होंगे। शहर आगे बढ़ेगा।
5. प्रशासन की सोच काल्पनिक है बल्कि लीज होल्ड होने से कई समस्याएं बढ़ रही हैं।
एक्शन टेकन रिपोर्ट : लीज होल्ड से फ्री होल्ड पर क्या होगा कन्वर्जन रेट?
कन्वर्जन रेट तय करने के मुद्दे पर एक्शन टेकन रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशासक ने एक कमेटी गठन करने का सुझाव दिया है जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। वह सभी हितधारकों से बातचीत कर कन्वर्जन के लिए रेट का सुझाव देंगे। उसी के आधार पर फैसला लिया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी पूछा कि कन्वर्जन के लिए किस राज्य मॉडल को अपनाया जाएगा। इस पर प्रशासन की तरफ से जवाब दिया गया कि दिल्ली ने इंडस्ट्रियल और व्यावसायिक प्लॉट्स के फ्री होल्ड के लिए 2003 में एक नीति अपनाई थी, वह मॉडल अपनाया जा सकता है।
इन संपत्तियों को नहीं मिलेगा फ्री होल्ड कन्वर्जन का फायदा
एक्शन टेकन रिपोर्ट में प्रशासन की तरफ से कहा गया कि अगर इंडस्ट्रियल और व्यावसायिक प्लॉट्स को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने की नीति अपनाई जाती है तो इसमें उन संपत्तियों का कन्वर्जन नहीं होगा जो प्रॉपर्टीज का कमर्शियल इस्तेमाल करने में असफल रहे हैं। बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने पर जिन्हें नोटिस मिला है और उनके केस अलग-अलग कोर्ट में लंबित हैं। इसके अलावा बकाया न चुका पाने वाले, उल्लंघन व मिस यूज आदि के कारण जिनकी प्रॉपर्टी को रद्द कर दिया गया है उन्हें भी कन्वर्जन का लाभ नहीं मिलना चाहिए। जो उद्योगपति इंडस्ट्रियल पॉलिसी के तहत अपने प्लॉट में इंडस्ट्रियल एक्टिविटी नहीं कर रहे हैं उन्हें भी कन्वर्जन की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।