चंडीगढ़। इस वर्ष कर्क संक्रांति रवि योग और सिद्धि योग के दुर्लभ शुभ संयोग में मनाई जाएगी। श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के सलाहकार और सेक्टर 28 के खेड़ा शिव मंदिर के पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि 16 जुलाई वीरवार की रात 11:39 बजे सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस दौरान चंद्रमा सिंह राशि में मघा नक्षत्र में रहेगा, जिससे संक्रांति का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा।
उन्होंने बताया कि सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहा जाता है। कर्क संक्रांति को श्रावण संक्रांति भी कहा जाता है और यह पर्व दान, स्नान, जप, तप एवं सूर्य उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस बार रवि योग और सिद्धि योग का संयोग बनने से धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष फल प्राप्त होगा। साथ ही व्यापार, शिक्षा और नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा।
उन्होंने बताया कि संक्रांति के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल मिले जल या किसी पवित्र नदी, सरोवर अथवा तीर्थ में स्नान करना चाहिए। इसके बाद तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं अन्य आवश्यक सामग्री का दान तथा गौ माता को हरा चारा, गुड़ और रोटी खिलाना विशेष पुण्यदायी माना गया है।
सेक्टर 15 के पंडित राम बहादुर मिश्र ने बताया कि कर्क संक्रांति पर सूर्य उपासना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ग्रह दोष और पितृ दोष शांत होते हैं। सुख, समृद्धि, आरोग्य और आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए दान-पुण्य एवं सूर्य आराधना का कई गुना फल प्राप्त होता है।