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सीमित नहीं हो हिंदी का दायरा, यह भाषा नहीं संस्कृति है:डॉ. गुरमीत सिंह

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चंडीगढ़। हिंदी महज एक भाषा या बातचीत का माध्यम नहीं है बल्कि एक संस्कृति है। इसका दायरा किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए। हिंदी का विस्तार दुनिया भर में होना चाहिए। यह बात पीयू के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गुरमीत सिंह ने अमर उजाला से चर्चा के दौरान कही।
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पीयू के डॉ. सिंह इन दिनों इटली के नेपिल्स यूनिवर्सिटी में स्थापित हिंदी चेयर पर कार्यरत हैं। इटली के विद्यार्थियों को हिंदी भाषा से जोड़ने के लिए डॉ. सिंह ने नेपिल्स विश्वविद्यालय में एक हिंदी क्लब की स्थापना की है। यह क्लब अलग-अलग गतिविधियों से वहां के विद्यार्थियों को हिंदी भाषा से जोड़ने का काम करेगा। क्लब का संचालन नेपिल्स विश्वविद्यालय के तीन विद्यार्थी दाविदे, लुईसा, मारत्जिया कर रहे हैं।
फिल्म और व्याख्यान से जगाएंगे हिंदी में रुचि
नेपिल्स विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों में हिंदी भाषा में रुचि पैदा करने के लिए हर सप्ताह एक हिंदी फिल्म दिखाई जाएगी। साथ ही ऑनलाइन अलग-अलग देशों के प्रोफेसर विद्यार्थियों को व्याख्यान देंगे। महीने के प्रथम सप्ताह में 3 मई को विद्यार्थियों को इंग्लिश-विंग्लिश फिल्म दिखाई जाएगी। 4 मई को पीयू के डॉ. भवनीत भट्टी हाइब्रिड भाषा के विषय पर विद्यार्थियों को ऑनलाइन व्याख्यान देंगे।
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हिंदी भाषा को दिया लंबा समय
डॉ. गुरमीत सिंह को केंद्र सरकार के दूरसंचार मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति में मनोनीत किया गया है। वर्तमान में इटली के नेपिल्स विश्वविद्यालय में स्थापित हिंदी चेयर पर कार्यरत हैं। पिछले वर्ष उज्बेकिस्तान के ताशकंद विश्वविद्यालय में भी विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में काम कर चुके हैं। बता दें कि अध्यापन कार्य करने से पहले लगभग दस वर्ष तक हिंदी भाषा के पत्रकार के रूप में काम कर चुके हैं। बतौर पत्रकार करगिल युद्ध की कवरेज के लिए उन्हें पंजाब सरकार ने सम्मानित किया था।
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