राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कैंपों में जाने वाले स्वयंसेवकों को मनोहर लाल खट्टर अक्सर भोजनालय में मिलते रहे हैं। प्रदेश स्तर पर गर्मियों में आयोजित होने वाले संघ शिक्षा वर्गों में संघ के पदाधिकारियों के जिम्मे अलग-अलग व्यवस्था रहती है। इनमें शारीरिक ट्रेनिंग के साथ-साथ भाषणों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, लेकिन खट्टर के जिम्मे आमतौर पर भोजनालय की व्यवस्था रहती है। उनके साथ काम करने वाले इसे उनकी सादगी की पराकाष्ठा मानते हैं।
हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता का रखते हैं पूरा ध्यान
1995 में जिस समय मनोहर लाल हरियाणा भाजपा के संगठन महामंत्री थे तब वे रोहतक जिले में कलानौर मंडल की बैठक लेने पहुंचे। बैठक में सभी कार्यकर्ता आए, लेकिन वहां के तत्कालीन मंडल अध्यक्ष रमेश भाटिया बैठक में नहीं पहुंच सके। खट्टर ने कार्यकर्ताओं से भाटिया के बारे में पूछा तो पता चला कि उनको बुखार है। बैठक संपन्न होने के बाद खट्टर सीधे रमेश भाटिया के घर पहुंचे और उनका कुशलक्षेम पूछा।
व्यवस्था कौशल का हर कोई हो जाता है मुरीद
1993 में रोहतक में उनके साथ संघ प्रचारक रहे पलवल निवासी प्रवीण गर्ग उनके सादगीपूर्ण जीवन व्यवहार और व्यवस्था कौशल से अत्यंत प्रभावित हैं। प्रवीण गर्ग कहते हैं कि खट्टर ने कभी भी अपने व्यवहार से किसी कार्यकर्ता को नाराज नहीं होने दिया। वे हंसमुख स्वभाव के धनी और हर आधुनिक तकनीक के प्रति जिज्ञासा रखते हैं। प्रवीण कहते हैं कि 1986 में हिसार और 1987 में कुरुक्षेत्र में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग में मनोहर लाल उनके मुख्यशिक्षक रहे हैं।
हर काम पर पैनी नजर
कई साल पहले फरीदाबाद के सूरजकुंड में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक थी। इस बैठक के लिए प्रदेश भर के पार्टी कार्यकर्ताओं के जिम्मे अलग-अलग व्यवस्था थी। रोहतक के कार्यकर्ताओं की ड्यूटी नई दिल्ली स्टेशन पर बाहर से आने वाले पदाधिकारियों को रास्ता बताने की लगी थी, लेकिन अनेक कार्यकर्ता जिज्ञासावश सूरजकुंड पहुंच गए, वहां पहुंचते ही मनोहर लाल खट्टर ने इन्हें डांटा। कहा, कि तुम्हारी ड्यूटी तो रेलवे स्टेशन पर लगी थी, यहां क्या कर रहे हो। कार्यकर्ता यह जानकर हैरान थे, खट्टर को एक-एक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी का कितना ध्यान है।