चंडीगढ़। पंजाबी लेखक सभा चंडीगढ़ एवं सूर सांझ कला मंच खरड़ द्वारा पंजाब साहित्य अकादमी के सहयोग से पंजाब कला परिषद में रविवार को इलाज के रूप में साहित्य का योगदान विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में आयोजित इस संगोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार जंगबहादुर गोयल की बहुचर्चित किताब साहित्य संजीवनी पर चर्चा की गई। इस संगोष्ठी में जंगबहादुर गोयल ने कहा कि पुस्तकों के साथ हमारा आत्मिक संबंध जुड़ जाता है तो जीने का एक मकसद मिल जाता है। किताबें मन का शोक, दिल का दर्द, भूख की पीड़ा ही कम नहीं करतीं, बल्कि आंख बचाकर दुखते सिर के नीचे संबंल का तकिया रख देती हैं। इस मौके पर बतौर विशेष अतिथि मौजूद पंजाब की पोस्ट मास्टर जरनल मनीषा बंसल बादल ने कहा कि साहित्य पढ़ने के लिए नहीं, जीने के लिए होता है। इस संगोष्ठी में भूपेन्द्र सिंह मलिक, जगदीप सिद्धू, बलकार सिद्धू, डॉ. सुरजीत, डॉ. तेजिन्दर सिंह, डॉ. साहिब सिंह, परमजीत परम, कुलविंदर चहल, सेवानिवृत्त जज एसके अग्रवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।