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पीजीआई चंडीगढ़ः जिस ओटी कांप्लेक्स के लिए डॉक्टरों ने दिए थे धरने, उस पर फिलहाल लगी रोक

Mon, 20 Jan 2020 02:40 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई चंडीगढ़
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आज से चार साल पहले जिस ऑपरेशन थियेटर (ओटी) कांप्लेक्स को बनाने के लिए पीजीआई के डॉक्टरों ने धरना-प्रदर्शन किया था, उस प्रोजेक्ट को अब पीजीआई ने रोक दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत 25 से ज्यादा आपरेशन थियेटर बनकर तैयार होने थे, जो कई आधुनिक उपकणों से लैस होते।
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करीब 250 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ मरीजों को लाभ पहुंचता बल्कि आपरेशन की लंबी लिस्ट से भी छुटकारा मिलता। पीजीआई की दलील है कि इस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए कैंपस में जगह नहीं है। जो जगह तय हुई थी, वह ओटी के लिए मुनासिब नहीं है।

इस प्रोजेक्ट की बजाय पीजीआई का मुख्य फोकस अब उन ओटी को शुरू करने पर रहेगा, जो सालों से बंद पड़ी हैं। पीजीआई में करीब 17 से ज्यादा ऐसे ऑपरेशन थियेटर हैं, जो बंद चल रहे हैं। यदि ये ओटी चल पड़ती हैं तो इसके फायदे जरूर नजर आएंगे। क्योंकि ओटी नहीं होने की वजह से आपरेशन की लंबी तारीख मिल रही है।
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यूरोलाजी और जनरल सर्जरी के मरीजों को अपनी सर्जरी के लिए कम से कम चार से छह महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि पीजीआई के पास सर्जन काफी संख्या में है। बताया जा रहा है कि कुछ ऐसे नए सर्जन भी हैं, जिन्हें ओटी नहीं मिल रही है। ऐसे में इस प्रोजेक्ट के ठप होने से पीजीआई सर्जन को बहुत बड़ा झटका लगा है।

ओटी के लिए जेपी नड्डा तक दौड़े थे डॉक्टर

पीजीआई के सर्जनों के लिए आपरेशन थियेटर कितना जरूरी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2016 में संस्थान के डॉक्टर तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के पास गए थे। मुलाकात से पहले दो हफ्ते तक कैरोब्लॉक के सामने डॉक्टरों ने धरना प्रदर्शन किया था। उसके बाद नड्डा से मुलाकात हुई थी। मुलाकात के दौरान नड्डा ने ओटी कांप्लेक्स बनाने की स्वीकृति दे दी थी।

उस दौरान मीटिंग में शामिल एक डॉक्टर ने बताया कि जब नड्डा को बताया गया कि नेहरू हास्पिटल की ओटी कांप्लेक्स के स्थिति कितनी बुरी है, तो ओटी कांप्लेक्स बनाने को तैयार हो गए। उस दौरान तत्कालीन डायरेक्टर से यह भी कहा था कि पैसे की कोई कमी नहीं है। जल्द से जल्द प्लान भिजवाइए। करीब 250 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार हुआ था।

यूटी प्रशासन ने एफआर में छूट देकर दी थी परमिशन
मंत्री से प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद पीजीआई का इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट इस प्रोजेक्ट को लेकर यूटी प्रशासन के पास गया, लेकिन चीफ आर्किटेक्ट ऑफिस ने इस प्रोजेक्ट पर आपत्ति लगा दी थी। उस दौरान पीजीआई प्रशासन पीजीआई का फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) जाने बगैर पीजीआई में होने वाली नई कंस्ट्रक्शन को मंजूरी नहीं देना चाहता।

जब यह बात पीजीआई के डॉक्टरों को पता चली तो उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन के होम सेक्रेटरी, एडवाइजर और प्रशासक से भी बात की। यूटी प्रशासन ने मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए एफएआर में छूट देकर ओटी कांप्लेक्स को मंजूरी दे दी थी।
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इसलिए जरूरी था ओटी कांप्लेक्स

पीजीआई में साल दर साल आपरेशन का बोझ बढ़ता जा रहा है। पीजीआई में अभी रोजाना लगभग 52 टेबल पर औसतन 300 से 400 छोटी-बड़ी सर्जरी हो रही हैं। नेहरू हास्पिटल के चौथे और पांचवें फ्लोर पर स्थित ऑपरेशन थिएटर काफी पुराने हो गए हैं। आए दिन ओटी में लीकेज की समस्याएं रहती है।

कभी लाइट की खराबी है तो कभी कुछ और। दूसरी तरफ सर्जरी से संबंधित डिपार्टमेंट यूरोलाजी, सर्जरी, प्लास्टिक डिपार्टमेंट, न्यूरोसर्जरी, आर्थोपीडिक्स, गेस्ट्रो सर्जरी में फैकल्टी मेंबरों की संख्या में इजाफा हो रहा। इतने ज्यादा सर्जन हो चुके हैं कि कई को आपरेशन थियेटर मिलते नहीं। इसी वजह से मरीजों की लंबी वेटिंग बढ़ रही है।

पीजीआई का इस समय मुख्य फोकस बंद पड़ी ओटी को शुरू करवाना है। करीब 17 ओटी बंद पड़ी है। इनमें दस ओटी नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक में हैं, जबकि बाकी दूसरे ब्लॉक में हैं। यदि ये ओटी शुरू हो जाएंगी तो आपरेशन की लंबी वेटिंग से काफी राहत मिल जाएगी।
- प्रो. जगतराम, डायेक्टर, पीजीआई

हमारी शुरू से ही मांग रही है कि आपरेशन थियेटर कांप्लेक्स बनना चाहिए। यह समय की मांग है। यदि बंद ओटी शुरू हो रही है तो अच्छी बात है, लेकिन हमारे लिए ओटी कांप्लेक्स सबसे महत्वपूर्ण है। इस मांग से हम पीछे नहीं हटेंगे।
- प्रो. जेएस ठाकुर, प्रेसिडेंट पीजीआई फैकल्टी एसोसिएशन
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