चंडीगढ़। पिछले 15 साल से अटकी यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम को पूरा करने की कोशिशें एक बार फिर तेज हो गई हैं। यूटी गवर्नमेंट इंप्लाइज चंडीगढ़ हाउसिंग वेलफेयर सोसाइटी के उपाध्यक्ष नरेश कोहली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है और योजना को जल्द सिरे चढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि कर्मचारी पक्की छत की आस में बैठे हैं। उन्होंने कहा है कि 15 साल पहले 2008 में प्रशासन की ओर से लीज होल्ड पर अपने कर्मचारियों के लिए आवासीय योजना लाई गई थी, जिसके अंतर्गत 8000 कर्मचारियों ने सीएचबी की ओर से निर्धारित अग्रिम राशि के रूप में 56 करोड़ जमा कराए थे। नवंबर 2010 में मकानों के लिए लक्की ड्रॉ में 3,930 सफल उम्मीदवारों की घोषणा की गई। शर्त रखी गई कि मकानों का कब्जा मिलने तक चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में अपना घर नहीं होना चाहिए।
इसी बीच 5 अक्तूबर 2012 को केंद्र सरकार की ओर से एक पत्र जारी किया गया कि किसी भी योजना के लिए बाजार मूल्य से कम पर जमीन न दिया जाए जबकि कर्मचारियों की आवासीय योजना 2008 की है। पहले सी-कैटेगरी का घर 13 लाख रुपये मूल्य का था। अब 99 लाख रुपये निर्धारित किया है। सरकारी कर्मचारी ईमानदारी से नौकरी करने वाला इतना अधिक मूल्य नहीं चुका सकता है। अब बहुत से कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए हैं। उन्हें सरकारी घर खाली कर के किराए पर रहना पड़ रहा है। हर बार चुनाव में वादा किया जाता है लेकिन वादा नहीं निभाया जाता। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि इस का संज्ञान लेकर कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाए। जब तक पहले से प्रस्तावित इस स्कीम का निर्माण नहीं हो जाता तब तक चंडीगढ़ में हाउसिंग बोर्ड कोई नई स्कीम न ले कर आए।