चंडीगढ़। मेडल पाने वालों की लंबी कतार देखकर एक बार तो मैं चौंक गई थी, लेकिन फिर यह आभास हुआ कि हम भारत की सर जमीन पर खड़े हैं। जहां पर ब्रांड और होनहार युवाओं की कोई कमी नहीं है। मेडल लेने वालों की लंबी कतार ही भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। जहां तक डॉक्टरी की बात है तो मैं भी इस पेशे से जुड़ी हूं। इसलिए मुझे भलीभांति पता है कि डॉक्टर कड़ी मेहनत, लगन और निष्ठा से मिलकर बना हुआ एक शब्द है। यह बातें केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने वीरवार को पीजीआई के 36वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
डॉ. भारती ने कहा कि डॉक्टर न केवल मरीजों की भलाई में योगदान देते हैं बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी बड़े पैमाने पर उनका योगदान है। उन्होंने डॉक्टर शब्द के एक एक अक्षर का अर्थ बताया और कहा कि गहरी भावनाओं, निरीक्षण करने वाली आंखों, देखभाल करने वाले दिल, प्रशिक्षित हाथों के गुणों के संयोजन के रूप में खुले दिमाग और असली इंसान के रूप में डॉक्टर की व्याख्या है। उन्होंने एक सफल चिकित्सक होने की अनिवार्यताओं पर गहराई से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारत में मेडिकल टूरिज्म पर सरकार बेहद गंभीर है। इसलिए स्थिति अब तेजी से बदल रही है। अब भारत के विकास पथ में तेजी के साथ गुणवत्ता पूर्वक देखभाल, कम लागत और सर्वोत्तम परिणाम के फल स्वरूप मेडिकल टूरिज्म एक बड़े अवसर के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। भार्गव सभागार में सुबह 9.30 बजे शुरू हुए दीक्षांत समारोह में चार वर्षों के 1775 पूर्व छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। वहीं, इसमें से 20 होनहार छात्रों को गोल्ड और 218 पूर्व छात्रों को उनके प्रदर्शन के आधार पर मेडल प्रदान किया गया। कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि के रूप में पीजीआई के पूर्व निदेशक प्रो. केके तलवार मौजूद रहे। छात्रों के साथ उनके परिजनों के लिए भार्गव सभागार के पास ही एक गुंबद बनाकर दीक्षांत समारोह की प्रस्तुति की गई। इस अवसर पर पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल, डीन एकेडमिक प्रो. नरेश पांडा, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल व सभी प्रशासनिक अधिकारी और फेकल्टी उपस्थित थे।
इनसेट
इन्हें मिला गोल्ड मेडल
1. कटारिया मेमोरियल गोल्ड मेडल
छात्र वर्ष
डॉ. अश्वीन सिंह परिहार 2018-19
डॉ. एस नीतिश भारद्वाज 2019-20
डॉ. अलीशा बब्बर 2020-21
डॉ. नायर रेवती शशि 2021-22
डॉ. वीरेश वोहरा 2021-22
2. मेजर जरनल अमीर चंद गोल्ड मेडल
डॉ. अजय कुमार 2018 पीएचडी के लिए
डॉ. नेहा 2019 पीएचडी के लिए
डॉ. प्रियंका सिंह 2020 पीएचडी के लिए
डॉ. निपुण वर्मा 2018
डॉ. जोगेन्दर कुमार 2019
डॉ. राहुल गुप्ता 2020
3. हृदय रोग के क्षेत्र में वीके सैनी गोल्ड मेडल
डॉ. चेतन बख्शी 2018
डॉ. शिप्रा भंसाली 2019
डॉ. राकेश कुमार 2020
4. प्रो. आर नाथ गोल्ड मेडल
डॉ. सप्तर्षि एलजी 2018
डॉ. लिजा दास 2019
डॉ. एल सतीश कुमार 2020
5. प्रो. डी सुब्रमण्यम गोल्ड मेडल
डॉ. सुरेश कुमार 2018
डॉ. अनुका शर्मा 2019
डॉ. गोपाल शर्मा 2020