चंडीगढ़। सेक्टर-35 स्थित प्राचीन कला केंद्र में बुधवार को मासिक बैठक का आयोजन किया गया। इसमें वायलिन वादक उस्ताद असगर हुसैन ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर उस्ताद अख्तर हसन ने जुगलबंदी की। कार्यक्रम की शुरुआत राग भोपाली से की। इसमें पारंपरिक अलाप के द्वारा राग के भावपक्ष को प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मत्त ताल में विलंबित गत पेश की गई। गायकी शैली को प्रमुखता देने वाले असगर ने सिलसिलेवार बढ़त में इस शैली का निर्वाह करते हुए वाहवाही के साथ तालियां बटोरीं। वायलिन वादन में विशेष तौर से गायकी और ताल का खूबसूरत समन्वय देखने को मिला। तानें, तिहाइयां और विभिन्न लयकारियों से सजी इस प्रस्तुति में मध्य लय तीन ताल में भी कुछ रचनाएं पेश की गईं। एक खूबसूरत झाले के बाद राग शिवरंजनी से सजी धुन से कार्यक्रम का समापन किया गया। संगीतज्ञ परिवार में जन्मे असगर हुसैन ने प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता उस्ताद अनवर हुसैन से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने वायलिन की बारीकियां उस्ताद गौहर अली खान और उस्ताद जहूर अहमद खान से सीखीं। असगर हुसैन को उनकी कला और प्रतिभा के कई पुरस्कार मिले हैं।
प्राचीन कला केंद्र की रजिस्ट्रार कथक गुरु डाॅ. शोभा कौसर एवं सचिव कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया। केंद्र के सचिव सजल कौसर ने बताया कि 14 अक्तूबर को जानी-मानी शास्त्रीय गायिका स्व. सरयू केलकर को समर्पित एक संगीत संध्या में विदूषी विनीता गुप्ता प्रस्तुति देंगी।