चंडीगढ़। नगर निगम सदन की 326वीं बैठक में मंगलवार को भ्रष्टाचार का मुद्दा जोरशोर से उठा। किसी पार्षद ने कहा कि भ्रष्टाचार से नगर निगम की नींव खोखली हो रही है तो किसी ने पिछले कुछ समय में हुई भर्तियों की जांच की मांग की। एमओएच विंग में सीबीआई की रेड और विजिलेंस कार्रवाई के मुद्दे पर भी पार्षदों ने सवाल खड़े किए। चर्चा में डॉक्टर साहब नाम का कई बार जिक्र आया। कहा गया कि सीबीआई की ट्रांसस्क्रिप्ट में ये नाम है। कार्रवाई के बारे में पूछा गया।बैठक की शुरुआत में ही कांग्रेस पार्षद गुरबक्श रावत ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बात करनी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने एमओएच विंग के दो अधिकारी गिरफ्तार किए। यह शर्मिंदगी की बात है। भ्रष्टाचार नगर निगम की जड़ों को खोखला कर रहा है। कर्मचारी रखने और निकालने का खेल चल रहा है। एक ही विंग बार-बार निशाने पर है। इसका मास्टरमाइंड कौन है। ये किसके कहने पर हो रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए। सभी कांग्रेस के पार्षदों ने इस संबंध में पोस्ट भी लहराए। जिस पर लिखा था कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। पार्षद जसबीर बंटी ने कहा कि अगर एक अधिकारी के खाते से 1.6 करोड़ का सोना मिला है और छानबीन की जाए तो न जाने कितने अफसरों के खाते से मिलेंगे। कोई ऐसा विंग नहीं है, जहां भ्रष्टाचार न हो। पैसे लेकर अफसर कर्मचारियों की भर्ती कर रहे हैं। कुछ महीने पहले 341 कर्मी रखे गए हैं। तरुणा मेहता ने कहा कि कब तक कर्मचारियों को रखने में भाई-भतीजावाद चलेगा। आम लोगों के बच्चों को कब मौका मिलेगा।
भर्तियों की जांच के लिए कमेटी पर आमने-सामने आए मेयर आयुक्त
भाजपा के पार्षद महेशइंदर सिंह सिद्धू ने भी कई सवाल उठाए। कहा कि भ्रष्टाचार से सभी का नाम खराब हो रहा है। पार्षदों की एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बने, जो जांच करे कि पिछले डेढ़ साल में कितने कर्मियों को हटाकर दोबारा रखा गया है। अन्य भर्तियों की भी जांच हो। कमेटी के पास शक्ति हो कि वह शिकायतकर्ताओं को बुलाकर पूछताछ कर सके और भर्ती के रिकॉर्ड की भी जांच कर सके। मेयर अनूप गुप्ता ने आयुक्त आनिंदिता मित्रा से पूछा कि क्या ऐसी कमेटी बना सकते हैं। आयुक्त ने कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता। मेयर ने पूछा कि पार्किंग घोटाले के समय भी एक कमेटी बनी थी तो क्या वह गलत तरीके से बनाई गई थी। पार्षदों ने भी सवाल उठाए। कहा कि सदन इस संबंध में प्रस्ताव पास करे। इस पर आयुक्त ने कहा कि सदन चाहे तो कमेटी बनाने के लिए सिफारिश दे सकता है। नेता प्रतिपक्ष दमनप्रीत सिंह ने भी कमेटी बनाने के पक्ष में हामी भरी।
सदन में गूंजा ''डॉक्टर साहब'' नाम, सिद्धू बोले- सीबीआई की ट्रांसस्क्रिप्ट में है ये नाम
सिद्धू ने कहा कि एमओएच विंग के दो अधिकारी रंगे हाथ पकड़े गए लेकिन इसमें और भी कई अधिकारियों के नाम है। सिद्धू ने कहा कि इसमें एक ''डॉक्टर साहब'' का भी नाम आ रहा है। ये नाम आना सवाल खड़ा करता है। इसके बावजूद भी क्या उस विभाग के प्रमुख को उनके पद पर बरकरार रखना सही है। इस पर आयुक्त मित्रा ने कहा कि उनके पास किसी भी जांच एजेंसी से आधिकारिक सूचना नहीं आई है। सीबीआई अगर आरोप लगाकर किसी भी अधिकारी का लिखित में नाम देगी तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी। इस पर सिद्धू ने कहा कि सीबीआई उनको क्यों लिखेगी। मित्रा ने कहा कि पार्षद के पास कोई तथ्य हैं तो वह बताएं। कार्रवाई होगी। पार्षद ने यह भी पूछा कि क्या चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर के पास शक्ति है कि वो किसी इंस्पेक्टर को बहाल कर सके। अगर ऐसा नहीं है तो ये शक्ति किसकी है।
पार्षदों ने एमओएच को घेरा, कहा- नहीं उठाते फोन
पार्षद प्रेमलता ने कहा कि एमओएच डॉ. विनय मोहन कभी फोन नहीं उठाते। अन्य पार्षदों ने भी यह बात दोहराई। पार्षद रामचंद्र यादव ने कहा कि वह एमओएच को 50 से ज्यादा मैसेज कर चुके हैं लेकिन किसी का जवाब नहीं देते। उनके इलाके के सफाई कर्मियों के पास झाड़ू नहीं है। ये समस्या बताई तो हल करने की बजाए कर्मियों को नौकरी से निकालने की धमकी दे दी गई। इस पर एमओएच ने जवाब दिया कि एक-दो बार ऐसा हो सकता है लेकिन अक्सर वह फोन उठाते हैं। पार्षदों ने कहा कि अगर अधिकारी पार्षदों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं तो जनता के साथ क्या करते होंगे। मेयर ने पूरे मुद्दे पर कहा कि जो अधिकारी निगम का नाम खराब कर रहे हैं, उनकी नगर निगम में जरूरत नहीं है।