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Chandigarh News: फैसले की घड़ी करीब... 20 दिसंबर को आखिरी बहस, आरोपियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जानिए क्या है मामला

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चंडीगढ़। वर्ष 2017 में शिमला जिले के कोटखाई में गुड़िया दुष्कर्म व हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में हत्या का मामला इसी महीने खत्म हो सकता है। वीरवार को हुई सुनवाई और सीबीआई की कोर्ट ने दोनों पक्षों की आखिरी बहस के लिए 20 दिसंबर की तारीख निर्धारित कर दी है। 20 दिसंबर तक मामले में रोजाना सीबीआई कोर्ट में सुनवाई होगी, जिसमें मामले में नामजद सभी आरोपी को अलग-अलग तारीख दी गई है। इस मामले में फैसला आने से पहले ही नामजद आरोपियों की भी सांसें अटक गई हैं क्योंकि इसमें सारे आरोपी पुलिस के जवान हैं।
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गौरतलब है कि शिमला जिले के कोटखाई में 4 जुलाई 2017 को लापता हुई 16 वर्षीय छात्रा का शव कोटखाई के तांदी के जंगल में निर्वस्त्र हालत में मिला था। मामले जांच के लिए शिमला के तत्कालीन आईजी सैयद जहूर हैदर जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की थी, जिसने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। मौत का यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया और जांच में खुलासा हुआ कि सूरज की मौत पुलिस प्रताड़ना के कारण हुई थी। इसी आधार पर सीबीआई ने आईजी जैदी सहित मामले से जुड़े नौ अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या की धारा 302, सुबूत खुर्द-बुर्द करने की धारा 201 सहित अन्य कई संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। वर्ष 2017 में इस मामले को शिमला जिला अदालत से चंडीगढ़ सीबीआई अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था।
कोर्ट ने बंद किए साक्ष्यों के बयान, फैसले की घड़ी का इंतजार
इस मामले में वीरवार को हुई सुनवाई में आरोपी संख्या 5 और 7 ने अलग-अलग बयान देकर अपने बचाव साक्ष्यों को बंद कर दिया है। आरोपी 8 के अधिवक्ता ने भी अलग-अलग बयान देकर अभियुक्तों की ओर से बचाव साक्ष्य को बंद कर दिया जबकि आरोपी 9 ने अलग-अलग दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए बयान देकर साक्ष्य को बंद कर दिया। लेकिन आरोपी नंबर 3 ने एक बचाव पक्ष के गवाह डॉ. राहुल गुप्ता से पूछताछ की है और अपने बचाव में कोटखाई थाने के एसएचओ को फिर से पूछताछ के लिए बुलाने की गुहार लगाई। हालांकि एसएचओ कोटखाई को बीती 5 दिसंबर को हुई सुनवाई में समन जारी कर बयान देने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। आरोपी-3 के मौखिक आग्रह पर अपने बचाव में एसएचओ को बतौर गवाह पेश करने का वचन भी लिया था और उसे पुनः तलब करने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद एसएचओ कोर्ट में नहीं पहुंचा। कोर्ट ने वीरवार को अपने आदेशों में लिखा कि आरोपी-3 सीबीआई के डर से सच्चाई बताने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए कोटखाई एसएचओ गवाह के रूप में गवाही देने के लिए आगे नहीं आ रहा है। कोर्ट ने कहा कि मामला सात साल से अधिक पुराना है। मामले में सभी आरोपियों को अपना बचाव करने के लिए पर्याप्त समय और मौके दिए गए। आरोपी-3 को छोड़कर सभी ने अपने बयान के द्वारा अपना बचाव बंद कर दिया है। इसलिए बचाव साक्ष्य के लिए इस मामले को आगे स्थगित करने का कोई औचित्य नहीं है। इसलिए आरोपी-3 के बचाव में साक्ष्य कोर्ट द्वारा बंद किया जाता है। अगली कार्रवाई अब 20 दिसंबर हो होने वाली अंतिम बहस के लिए स्थगित की जाती है।
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सभी आरोपियों को मामले के निपटारे तक उपस्थित होने के आदेश
सभी आरोपियों को मामले के निपटारे तक उपस्थित होने के लिए आदेश दिए गए और कोर्ट ने कहा कि अब किसी को इस मामले में अनुपस्थिति के लिए छूट नहीं दी जाएगी और न ही कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस मामले में 13 दिसंबर को शिकायतकर्ता सीबीआई पक्ष, 16 को आरोपी आईपीएस जहूद हैदर जैदी, 17 को आरोपी दीप चंद शर्मा ओर मोहन लाल, 18 दिसंबर को आरोपी सूरत सिंह, 19 दिसंबर काे आरोपी मनोज जोशी व डंडूब वांगियाल नेगी सहित 20 दिसंबर आरोपी राजिंद्री सिंह, रफी मोहम्मद व रंजीत सतेता के लिए निर्धारित की गई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को यह स्पष्ट कर दिया कि 20 दिसंबर को बहस पूरी होने के बाद कोई और स्थगन नहीं दिया जाएगा।
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