अवैध माइनिंग के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के माइनिंग विभाग पर ही सवाल खड़े कर दिए। कोर्ट ने कहा कि बिना अधिकारियों की सांठगांठ अवैध माइनिंग संभव नहीं है। लिहाजा आरोपी के साथ ऐसे अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जानी बेहद ही जरूरी है ताकि अन्य अधिकारियों को यह चेतावनी मिल जाए कि अगर ऐसा हुआ तो उनको भी आपराधिक मामले का सामना करना पड़ सकता है।
जस्टिस रामेंद्र जैन ने यह आदेश अवैध माइनिंग के एक आरोपी मुनीश कुमार द्वारा सीनियर एडवोकेट अतुल लखनपाल के जरिये दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। शिकायत के अनुसार याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उसने अपने निर्धारित एरिया के बाहर बड़े पैमाने पर अवैध माइनिंग की है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ जालंधर के मेहतपुर पुलिस थाने में 29 अप्रैल को माइंस एंड मिनरल्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
एडवोकेट अतुल लखनपाल ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ रंजिश के तहत ही यह फर्जी मामला दर्ज किया गया है। जब उस एरिया में माइनिंग इंस्पेक्टर और अन्य हमेशा निगरानी रखते हैं तो कैसे कोई अवैध माईनिंग कर सकता है। याचिका पर जस्टिस जैन ने कहा कि यह बताना जरूरी नहीं कि माइनिंग विभाग के सभी संसाधन और काबिल अधिकारी, इंस्पेक्टर और अन्य स्टाफ हैं, जो हमेशा मुस्तैदी से निगरानी करते हैं। ऐसे में यह आरोपी के खिलाफ यह आरोप लगाना कि वह अवैध माइनिंग करता रहा है, सही नहीं लगता। जब आरोपी अवैध तरीके से माइनिंग करता रहा था, तब विभाग के अधिकारी कहां थे।
बिना विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के अवैध माइनिंग की ही नहीं जा सकती है। तय है कि इसमें अधिकारी भी शामिल हैं तो क्यों नहीं ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी आरोपी के साथ ही कार्रवाई कर चालान किया जाना चाहिए। लिहाजा हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को तो जमानत दे दी है। लेकिन साथ ही पंजाब सरकार को निर्देश भी दे दिए हैं कि इस मामले की पूरी जांच की जाये और उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए जो इस अवैध माइनिंग में शामिल हों। इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर इसकी स्टेटस रिपोर्ट मामले की अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट में पेश कराने के आदेश भी दिए गए हैं।