पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी को बड़ा झटका देते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को गलत करार देते हुए इसे खारिज कर दिया है। साथ ही यह स्पष्ट किया है कि यदि यूनिवर्सिटी अब इन पदों को भरना चाहती है तो नए सिरे से विज्ञापन जारी कर नए योग्यता मानकों को अपनाते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पूरा करे।
मामले में अपना फैसला सुनाते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी नॉन टीचिंग एसोसिएशन की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया, जबकि धर्मपाल शर्मा की याचिका को आंशिक मंजूरी देते हुए डीआर की नियुक्ति की प्रक्रिया को खारिज कर दिया।
अपने विस्तृत फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि जब डीआर की नियुक्ति की प्रक्रिया में एक संशोधन लाया गया तभी से इसमें अनियमितताएं आरंभ हो गई। इसके बाद इंटरव्यू के लिए बुलाते हुए भी नियमों की पालना नहीं की गई।
आवश्यक संशोधनों को मंजूरी सिंडीकेट ने फरवरी 2016 में दी। ऐसे में इस मामले में याचिकाकर्ता भले ही रिटायर हो चुका हो, लेकिन उसकी याचिका को अवैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अब इस नियुक्ति प्रक्रिया को यदि यूनिवर्सिटी जारी रखना चाहती है तो आदेशों के अनुरूप ही इसे पूरा करना होगा।
नॉन टीचिंग इंप्लाइज फेडरेशन ने किया फैसले का स्वागत
कोर्ट, कंज्यूमर फोरम
- फोटो : फाइल फोटो
पहले विज्ञापन निकाला जाए, जो नए मानकों के अनुरूप हो। इसके बाद चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय मानकों के अनुरूप पदों की संख्या के अनुसार आवेदकों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाए। इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा किया जाए। साथ ही जो संशोधन हैं, उन्हें एक माह की अवधि के भीतर यूनिवर्सिटी के नियमों में शामिल कर लिया जाए।
यह था मामला
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए पीयू में डिप्टी रजिस्ट्रार के 6 पदों पर की जा रही नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचिका में नियमों को संशोधित करने और इसके बाद विज्ञापन की अवधि बढ़ाने के स्थान पर नया विज्ञापन निकालने को चुनौती दी गई थी।
इसके बाद बताया गया कि पदों की संख्या 6 थी और आवेदक 18 बावजूद इसके 87 लोगों को इंटरव्यू के लिए बुला लिया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
नॉन टीचिंग इंप्लाइज फेडरेशन ने किया फैसले का स्वागत
डीआर की नियुक्ति को लेकर आए हाईकोर्ट के फैसले के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी नॉन टीचिंग इंप्लाइज फेडरेशन के अध्यक्ष दीपक कौशिक ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह नॉन टीचिंग कर्मचारियों की जीत है।