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Chandigarh News: हीटर और ब्लोअर की गर्मी कहीं खराब न कर दे सेहत

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चंडीगढ़। कड़ाके की ठंड ने हीटर और ब्लोअर की मांग बढ़ा दी है। लोग घरों में कई-कई घंटे लगातार इसे ऑन रख रहे हैं ताकि शरीर के तापमान के साथ पूरा कमरा गर्म बना रहे। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ शरीर को गर्म रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के कम से कम उपयोग की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्राकृतिक तरीके से उत्पन्न की गई गर्मी हृदय और फेफड़े के साथ त्वचा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसके उपयोग से त्वचा और सांस संबंधी परेशानियां लेकर कई मरीज जीएमएसएच-16 की ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
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जीएमएसएच 16 के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि सर्दी के बीच रूखे त्वचा की शिकायत वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ रही है। इन मरीजों में से ज्यादातर हीटर और ब्लोअर का उपयोग करने वाले हैं। हीटर से निकलने वाली गर्म हवा त्वचा को रूखा और लाल कर सकती है क्योंकि इसकी गर्म हवा कमरे में मौजूद नमी को सोख लेती है, जिससे त्वचा संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। इससे घर में ऑक्सीजन की मात्रा भी कम होने लगती है, जो कई बार जानलेवा भी हो सकती है।
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हो सकती है सांस की परेशानी
जीएमएसएच 16 के पूर्व फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. हनी साहनी ने बताया कि आर्टिफिशियल हीटिंग से बचने की जरूरत है। अपने कमरों में हीटर और ब्लोअर से हम जो गर्माहट पैदा करते हैं, उससे बचना चाहिए क्योंकि इसके चलते कई तरीके की समस्याएं हो सकती हैं। आर्टिफिशियल हीटिंग सबसे पहले हवा को ड्राई कर देती है, ड्राई हवा नाक से लेकर फेफड़ों तक को परेशान करती है। ऐसे में खांसी, ड्राइनेस, डिहाइड्रेशन की समस्याएं हो जाती हैं।
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बच्चे को भी खतरा
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन का कहना है कि अगर बच्चे के कमरे में हीटर चलता है तो त्वचा और नाक को नुकसान हो सकता है। शिशुओं की त्वचा पर चकत्ते भी पड़ सकते हैं। ज्यादा छोटे बच्चों को गंभीर स्किन प्रॉब्लम हो सकती है इसलिए कोशिश करें कि उनके कमरे में हीटर ज्यादा देर तक न चलाया जाए। उसे सामान्य तापमान पर ही चलाएं ताकि कमरे में ऑक्सीजन का स्तर मेंटेन किया जा सके।
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इनसे लाएं शरीर में गर्मी
अदरक की चाय, मूंगफली, गुड़, रेवड़ी गजक, मेथी की खिचड़ी, मौसमी सब्जियां, गाजर का हलवा, बादाम, बाजरे, मक्की का आटा और तिल गुड़ का गजक जैसी चीजों को अपने खानपान में शामिल करें।
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इसका रहता है खतरा
- हीटर के लगातार इस्तेमाल से आक्सीजन लेवल कम हो जाता है ऐसे में सुस्ती, जी मिचलाना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- हीटर से सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। कार्बन डाईऑक्साइड का लेवल बढ़ने से घुटन महसूस हो सकती है।
- ज्यादा देर तक हीटर का इस्तेमाल करने से सांस के रोगियों के फेफड़ों में बलगम जमने लगता है, जिससे खांसी और छींक आने लगती है।
- लगातार हीटर चलाने से त्वचा संबंधी परेशानी जैसे खुजली, जलन या लाल निशान हो सकते हैं।
- बंद कमरे में रातभर हीटर चलाने से ऑक्सीजन कम होने लगता है जिससे दम घुटने का खतरा रहता है।
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इन बातों का रखें ध्यान
-जब भी हीटर का इस्तेमाल करें, कमरे में किसी बर्तन में पानी भरकर रख दें। इससे वाष्पीकरण होता रहेगा और नमी का स्तर बरकरार रहेगा।
- हीटर को एक सही तापमान पर सेट कर दें, जिससे रूम ज्यादा गर्म न हो।
- जब हीटर चलाएं तो कमरे का दरवाजा या एक खिड़की खोलकर रखें। इससे कमरे में साफ हवा और ऑक्सीजन का लेवल ठीक रहेगा।
- रात भर हीटर चलाकर कभी न रखें। सोते वक्त 1-2 घंटे के लिए हीटर चलाएं, फिर हीटर को स्विच से बंद करके ही सोएं।
- बच्चों और बुजुर्गों के कमरे में रूम हीटर का इस्तेमाल कम करें।
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