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सरकार ने 12 सीपीएस से कामकाज लिए वापस, कोर्ट में दी जानकारी

Thu, 27 Oct 2016 09:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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highcourt
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पंजाब सरकार ने छह मुख्य संसदीय सचिवों से कामकाज वापस ले लिया है। इनकी नियुक्ति अप्रैल महीने में की गई थी। यह जानकारी पंजाब सरकार ने बुधवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दी। 
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सरकार की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार की अपील पर रोक नहीं लगाई है, केवल मामले के सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाए जाने के चलते सरकार ने अप्रैल में नियुक्त सभी छह मुख्य संसदीय सचिवों से कामकाज वापस ले लिया है।

बीते अगस्त माह में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की ओर से वर्ष 2012 में नियुक्त 18 मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को असंवैधानिक करार देते हुए रद कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई। 
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सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर सरकार ने उठाया कदम

कोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
इधर, हाईकोर्ट की ओर से 12 सीपीएस को लेकर दिए गए उक्त फैसले के बाद पंजाब में छह और मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को भी चुनौती देती याचिका पर सुनवाई जारी है।

इसी बीच, बुधवार को हरियाणा सरकार ने सीपीएस नियुक्ति के मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने अलग प्रावधान के तहत मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति की है। 

गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने भी चार मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति की है। हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने पंजाब सरकार की तरह संविधान के अनुच्छेद-162 की बजाय अनुच्छेद-187 के तहत नियुक्ति की है, जो सही है, इसलिए बीते अगस्त माह में पंजाब के मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद किए जाने का हाईकोर्ट का फैसला हरियाणा में लागू नहीं होता। 

हरियाणा सरकार की ओर से हरियाणा के एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने कहा कि वे इस मामले में मेरिट के आधार पर बहस को तैयार हैं। उधर, याचिकाकर्ता जगमोहन सिंह भट्टी ने हाईकोर्ट से अपील की है कि हरियाणा के चारों मुख्य संसदीय सचिवों को जारी किए जा रहे वित्तीय लाभ पर रोक लगाई जाए। फिलहाल, हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इंकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई एक दिसंबर तय कर दी।
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