चंडीगढ़। कभी राजाओं और महाराजाओं की शान माना जाने वाला पारंपरिक भारतीय खेल चौसर अब आधुनिक दौर में पच्चीसी के रूप में युवाओं के बीच अपनी पहचान बना रहा है। दिमागी कौशल, रणनीति और टीम भावना का यह खेल एक बार फिर लोकप्रियता हासिल कर रहा है। हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित जूनियर एवं सीनियर राष्ट्रीय पच्चीसी चैंपियनशिप 2025-26 में खिलाड़ियों की बड़ी भागीदारी ने इसके बढ़ते क्रेज की झलक दिखाई। दो दिवसीय प्रतियोगिता में चंडीगढ़ सहित विभिन्न राज्यों के खिलाड़ियों ने अलग-अलग वर्गों में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों का कहना है कि पच्चीसी केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि टीमवर्क, धैर्य और रणनीतिक सोच विकसित करने वाला खेल भी है।
दो वर्ष पहले शहर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर के दौरान उन्हें इस खेल की जानकारी मिली थी। शुरुआत में खेल थोड़ा कठिन और अनजान लगा, लेकिन नियमित अभ्यास के बाद इसकी रणनीति और रोमांच ने उन्हें आकर्षित किया। वह अब तक दो राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं।- भाव्या, राष्ट्रीय खिलाड़ी
राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस खेल के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। लड़के और लड़कियां दोनों ही बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। आने वाले समय में ग्रासरूट स्तर से खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए विशेष योजनाएं शुरू की जाएंगी, ताकि इस पारंपरिक भारतीय खेल को नई पीढ़ी के बीच और अधिक लोकप्रिय बनाया जा सके।- खुशहाल सिंह, सचिव, चंडीगढ़ पच्चीसी गेम एसोसिएशन