चंडीगढ़। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रजनीश गर्ग की अदालत ने सेक्टर-15 स्थित पेट्रोल पंप के पास ओल्ड बुक्स मार्केट में साइट का अधिकार देने से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए नगर निगम की अपील को कॉस्ट के साथ रद्द कर दिया है।
नगर निगम ने सेक्टर-15डी के मनोज कुमार व इस्टेट अफसर को पार्टी बनाते हुए नवंबर 2019 में अदालत में यह अपील लगाई थी। अपील में सिविल जज वरुण नागपाल के सितंबर 2019 के मनोज कुमार के हक में आए फैसले को चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने अपील को रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
यह था मामला...मनोज ने सेक्टर-15 की ओल्ड बुक्स मार्केट में लाइसेंसिंग ऑफ बिल्ट अप प्लेटफॉर्म्स टू द सेकंड हैंड बुक सेलर्स ऑफ सेक्टर-15 चंडीगढ़ स्कीम, 2007 के तहत साइट की दावेदारी पेश की थी। यह भी मांग की कि प्रतिवादी को आदेश दिए जाएं कि उन्हें साइट अलॉट करने का अधिकार दें। मनोज ने अपील में कहा था कि अक्तूबर, 2006 में इस्टेट ऑफिस और निगम के जॉइंट सर्वे से पहले 10 साल तक वह सेक्टर-15 में पीयू के गेट नंबर 2 के सामने लगने वाली सेकंड हैंड बुक्स बाजार में दुकान करते थे। इसके साथ ओल्ड बुक्स मार्केट एसोसिएशन के मेंबर भी रहे। फरवरी 2006 में पहले सर्वे में उनका नाम आया पर जगह नहीं दी गई। अक्तूबर में दूसरा सर्वे बिना जानकारी के कर दिया गया। उस समय वह हिमाचल प्रदेश स्थित अपने गांव गए थे, जिसके चलते वह सर्वे का हिस्सा नहीं बन सके। इसके बाद निगम से कई बार मांग करने के बावजूद साइट अलॉट नहीं की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों पर गौर करने के बाद ट्रायल कोर्ट ने मनोज के हक में फैसला दे दिया था।
नगर निगम ने कहा कि मनोज के सर्वे में न होने के बावजूद उसके पिता के साथ उसे एक जॉइंट साइट अलॉट कर दी गई थी। वहीं उसके भाई को भी साइट दी गई थी। दूसरी ओर, मनोज ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को आधार बनाते कहा कि पहले सर्वे में उसका नाम आया पर उस पर विचार नहीं किया गया था।