चंडीगढ़। नगर निगम के अकाउंट्स और ऑडिट ब्रांच की भारी लापरवाही सामने आई है। ब्रांच के किसी कर्मचारी ने सरकारी फाइल ठेकेदार को दे दी, जिसके बाद ठेकेदार वह फाइल लेकर सीधे आयुक्त आनिंदिता मित्रा के पास पहुंच गया। मामले का आयुक्त ने कड़ा संज्ञान लिया है और कहा कि जांच के आदेश दिए हैं कि किसने सरकारी फाइल निजी ठेकेदार को सौंपी है। उन्होंने इसे भारी लापरवाही बताया है।नगर निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा की तरफ से इस संबंध में लिखित में आदेश जारी किए गए हैं, जिसके अनुसार एक बिल्डिंग का काम करने वाला ठेकेदार नगर निगम की आयुक्त से मिला। उसके पास डड्डूमाजरा कॉलोनी के कम्युनिटी सेंटर के रिपेयर और रेनोवेशन की प्रिंसिपल अप्रूवल की ओरिजिनल फाइल मौजूद थी। ठेकेदार ने कहा कि 15-20 दिन हो गए लेकिन अब तक पेमेंट क्लियर नहीं हुई है। आयुक्त ने कहा कि उनकी पेमेंट को जल्द ही क्लियर कर दिया जाएगा लेकिन इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि एक निजी व्यक्ति के पास सरकारी ओरिजिनल फाइल कैसे पहुंची। उन्होंने कहा कि यह गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। प्रारंभिक जांच में आयुक्त ने पाया कि यह फाइल ऑडिट ब्रांच में थी। जहां से इंजीनियरिंग विभाग के किसी कर्मचारी ने ठेकेदार को फाइल दे दी। इसे एक बहुत बड़ी लापरवाही मानते हुए आयुक्त ने नगर निगम के चीफ इंजीनियर को आदेश दिए कि वह सीसीटीवी फुटेज की जांच करें और साथ ही एक इंक्वायरी शुरू करें और तीन दिन में इसकी रिपोर्ट सौंपे। आदेश में कहा है कि यह पता लगाया जाए कि कैसे एक सरकारी फाइल निजी व्यक्ति के हाथ में आई।
वर्क की ओरिजिनल फाइल किसी निजी व्यक्ति के पास कैसे पहुंच सकती है। यह बड़ी लापरवाही है। इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। - आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम